Sachin Pilot Punjab Visit : पंजाब की सियासत में इन दिनों गहमागहमी अपने चरम पर है। कांग्रेस पार्टी ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों का रण जीतने के लिए अपनी रणनीति जमीन पर उतारनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट पांच दिवसीय दौरे पर सूबे में पहुंचे हैं। अपने इस दौरे के पहले दिन यानी 18 अक्टूबर को उन्होंने जालंधर से लेकर होशियारपुर तक ताबड़तोड़ बैठकें कीं और उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने हाल के दिनों में आपराधिक वारदातों और गैंगस्टरों की हिंसा के चलते अपनों को खोया है।
जालंधर में नेताओं को दिए चुनावी टिप्स, संगठन को धार देने की कवायद
सचिन पायलट के दौरे की शुरुआत रविवार सुबह जालंधर के होटल रामाडा से हुई। यहां उन्होंने सुबह 9 बजे लुधियाना क्षेत्र के कांग्रेस नेतृत्व और तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बंद कमरे में लंबी बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी जमीन तैयार करना रहा। पायलट ने पार्टी नेताओं को जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ने और आपसी एकजुटता बनाए रखने के लिए खास टिप्स दिए। स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
पीड़ित परिवारों से मिलकर जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश
संगठन की बैठकों के बाद सचिन पायलट सीधे तौर पर जन-सरोकार के मुद्दों पर फोकस करते नजर आए। जालंधर की मीटिंग के तुरंत बाद वे शाहकोट के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी दिवंगत संदीप नंगल अंबिया के परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
इसके बाद उन्होंने नकोदर में साल 2023 के दौरान गैंगस्टरों का शिकार बने कपड़ा व्यापारी टिम्मी चावला और उनके गनमैन के शोकसंतप्त परिजनों से भी मुलाकात की। दोपहर के वक्त टांडा उड़मुड़ विधानसभा के मियाणी गांव पहुंचकर उन्होंने हार्डवेयर कारोबारी दिवंगत बलविंदर सिंह के परिवार का हालचाल जाना और शाम को होशियारपुर में स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर दिन के दौरे का समापन किया।
पांच दिनों तक चलेगा मैराथन दौरा, कानून-व्यवस्था पर बड़ा हमला
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सचिन पायलट का यह पूरा दौरा 20 अक्टूबर तक यानी कुल पांच दिनों का है। इस दौरान वे मोगा, बठिंडा, मानसा, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, तरनतारन और अमृतसर जैसे तमाम जिलों का दौरा करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे के जरिए कांग्रेस एक तीर से दो निशाने साध रही है।
एक तरफ जहां पीड़ित परिवारों से मिलकर मौजूदा सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बैठकों के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की कोशिश की जा रही है ताकि आगामी चुनावों से पहले संगठन को पूरी तरह से मजबूत किया जा सके।

