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Thought of the Day: वक्त की हकीकत बयां करती हैं ये दो लाइनें, वीकेंड पर मन को शांत कर देगा आज का सुविचार

GGaganpreet Kaur
वक्त की हकीकत बयां करती हैं ये दो लाइनें, वीकेंड पर मन को शांत कर देगा आज का सुविचार
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शनिवार की सुबह अमूमन एक अलग ही सुकून लेकर आती है। हफ्ते भर की भागदौड़ के बाद आज का दिन थोड़ा ठहरने, सांस लेने और खुद से संवाद करने का होता है। दफ्तर जाने की कोई हड़बड़ी नहीं और न ही समय सीमा के भीतर किसी काम को निपटाने का तनाव। दिमाग के इसी खाली और शांत कोने में जब कोई गहरा विचार दस्तक देता है, तो जीवन की उलझनों के मायने साफ होने लगते हैं। इसी इत्मीनान के बीच आज का सबसे खूबसूरत सुविचार समय के उस सच से सामना करवाता है जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

“कितना भी पकड़ लो फिसलता जरूर है, ये वक्त है जनाब बदलता जरूर है”

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मुट्ठी में बंद रेत की तरह है समय की रफ्तार

इस सीधी और बेहद मारक लाइन का सीधा सा अर्थ यही है कि समय को बांध पाना किसी भी इंसान के बस की बात नहीं। घड़ी की सुइयां बिना रुके, बिना थके अपनी रफ्तार से चलती रहती हैं। जो पल अभी हमारा वर्तमान है, पलक झपकते ही वह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाता है। इंसान चाहे जितनी दौलत लुटा दे या जितनी ताकत लगा ले, वह गुजरे हुए एक सेकंड को भी वापस नहीं खरीद सकता। समय का यही निरंतर बहाव हमें सिखाता है कि स्थितियां कभी एक जैसी नहीं रहने वालीं।

न सुख स्थायी है, न दुख आखिरी स्टेशन

जब जिंदगी में सब कुछ हमारी मर्जी के मुताबिक चल रहा होता है, जब सफलता कदम चूमती है और खुशियां आंगन में बिखरी होती हैं, तब इंसान अक्सर एक भ्रम पाल लेता है। उसे लगता है कि यह दौर ताउम्र ऐसे ही चलता रहेगा। लेकिन समय का मूल चरित्र ही बदलाव है। जैसे घनी अंधेरी रात के बाद सूरज का निकलना तय है, ठीक वैसे ही बुरे दिनों की मियाद भी ढलना तय होती है। यह विचार मुश्किल वक्त में टूट रहे इंसान को ढांढस बंधाता है कि धैर्य रखो, यह बुरा दौर भी बीत जाएगा।

वक्त की लाठी और वर्तमान की कीमत

इतिहास गवाह है कि समय ने बड़े-बड़े सूरमाओं और अजेय साम्राज्यों को मिट्टी में मिला दिया। इसलिए यह सुविचार इंसान के भीतर पलने वाले अहंकार पर भी सीधा प्रहार करता है। पद, प्रतिष्ठा और पैसे का घमंड करने वालों को समय का चक्र बेहद खामोशी से सबक सिखा जाता है। समझदारी इसी में है कि जब आप कामयाबी के शिखर पर हों, तो आपके पैर जमीन पर रहें। इसके साथ ही, यह विचार हमें ‘प्रोक्रैस्टिनेशन’ यानी काम टालने की आदत से बचने की नसीहत देता है। जो करना है आज करिए, क्योंकि कल कभी किसी का नहीं हुआ।

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