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Barnala News: बरनाला सिविल अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, मरीज की पत्नी ने कमरे में बंद किए जाने का लगाया आरोप

VVinita Kohli
Barnala News: बरनाला सिविल अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, मरीज की पत्नी ने कमरे में बंद किए जाने का लगाया आरोप
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बरनाला : पंजाब के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा और वहां मिलने वाली वीआईपी सुविधाओं के दावे जमीनी स्तर पर कितने खोखले हैं, इसकी एक बेहद डरावनी और हैरान करने वाली तस्वीर बरनाला के सिविल अस्पताल से सामने आई है। अस्पताल के स्पेशल वार्ड में इलाज करवा रहे एक मरीज और उसकी पत्नी को आधी रात को कमरे के अंदर ही बंधक बना दिया गया। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बाहर से कुंडी लगा दिए जाने के बाद, दर्द से तड़पते मरीज की मदद करने के बजाय ड्यूटी स्टाफ खौफ का बहाना बनाकर तमाशा देखता रहा। इस घटना के बाद पीड़ित महिला ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर अस्पताल प्रबंधन की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। लाइव वीडियो के अनुसार बरनाला शहर की रहने वाली उषा भरी नामक महिला ने फेसबुक पर लाइव होकर इस खौफनाक वाक्य का खुलासा किया। 

उन्होंने बताया कि उनके पति के घुटनों का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद वह सिविल अस्पताल के स्पेशल वार्ड के कमरा नंबर 11 में भर्ती थे। बीती रात करीब 2 बजे ऑपरेशन के दर्द के कारण उनके पति को नींद नहीं आ रही थी और उषा भी उनके पास जाग रही थीं। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने बाहर से आकर उनके कमरे के दरवाजे की कुंडी लगा दी और उन्हें अंदर ही बंद कर दिया। पीड़ित महिला ने बताया कि उन्होंने मदद के लिए अंदर से दरवाजे को बहुत जोर-जोर से खटखटाया और आवाजें दीं, पर अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों या स्टाफ ने कोई सुध नहीं ली। आखिरकार कोई रास्ता न बचता देख बेबस महिला ने सुबह करीब 4 बजे वार्ड नंबर 25 के नगर पार्षद नवीन कौशल को फोन लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए काउंसलर नवीन कौशल तुरंत खुद सिविल अस्पताल पहुंचे और उन्होंने कमरे की कुंडी खोलकर अंदर बंद परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। 

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दरवाजा खुलने के बाद जब उषा भरी अपने तड़पते पति के इलाज के लिए ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के पास पहुंचीं, तो महिला के अनुसार जब उन्होंने स्टाफ से पूछा कि आवाज देने पर भी कोई क्यों नहीं आया, तो स्टाफ ने माना कि उन्हें दरवाजा खटखटाने की आवाज तो आ रही थी। पर उन्होंने कहा रात के समय सिर्फ लेडीज स्टाफ ही ड्यूटी पर था। हमें लगा कि कोई बाहरी व्यक्ति अस्पताल का गेट खटखटा रहा है। डर के मारे हम अपनी जगह से नहीं हिले कि कहीं हमारे साथ कोई अनहोनी घटना न घट जाए। अस्पताल जैसी सरकारी संस्थाओं में आधी रात को घट रही ऐसी खौफनाक घटनाएं सीधा चेतावनी दे रही हैं कि अब बरनाला के लोगों का सब्र टूट रहा है। पर देखना यह होगा कि सत्ता के नशे में चूर ये लीडर और अधिकारी कब अपनी गहरी नींद से जागकर लोगों की इस चीख-पुकार को सुनेंगे और जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार करेंगे।

बाहर से आई मर्दाना आवाज, पर नहीं खुला दरवाजा

उषा भरी ने बताया कि जब उन्हें कमरे के बाहर किसी संदिग्ध हलचल का अहसास हुआ, तो उन्होंने अंदर से आवाज लगाई, बाहर कौन है? दरवाजा खोलो। इस पर बाहर से एक मर्दाना आवाज आई खोलता हूँ। पर इसके बावजूद किसी ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद वह घबरा गईं। एक तरफ कमरे का दरवाजा बाहर से लॉक था और दूसरी तरफ उनके पति बेड पर गंभीर दर्द से बुरी तरह तड़प रहे थे, पर चाहते हुए भी वह डॉक्टर या नर्स को बुलाने के लिए बाहर नहीं जा सकीं।

सरकारी दावों की फूंक निकालती सिविल अस्पताल की घटना: प्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल

बरनाला के सिविल अस्पताल के स्पेशल वार्ड में आधी रात को मरीज और उसकी पत्नी को बंधक बनाए जाने की इस खौफनाक घटना ने राज्य की स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था के खोखलेपन को सरेआम नंगा कर दिया है। बदलाव और ईमानदारी का ढिंढोरा पीटकर सत्ता में आई मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान यदि सरकारी अस्पतालों के अंदर भी आम नागरिक और मरीज सुरक्षित नहीं हैं, तो सवाल उठना लाजमी है कि क्या यही वह बदलाव है, जिसका वादा पंजाब के लोगों से किया गया था? सबसे हैरान करने वाली और शर्मनाक बात सत्तापक्ष के स्थानीय प्रतिनिधियों की इस पूरे मामले पर साधी हुई चुप्पी है, जो सिस्टम की नाकामी पर पर्दा डालने की कोशिश जान पड़ती है।

एसएमओ का गोलमोल जवाब: फिर हम क्या कह सकते हैं इसमें

इस वीडियो वायरल होने के संबंध में एसएमओ इंदू बंसल ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है और ना ही किसी ने कमरा बंद किया है और ना ही हमारे संज्ञान में ऐसी कोई बात है। तीन-साढ़े तीन बजे एक लड़का टेस्ट करवा कर आया और दो-ढाई बजे वार्ड अटेंडेंट भी वहां गई है; फिर हम क्या कह सकते हैं इसमें। उन्होंने अपने स्टाफ से भी पूछताछ की तो उनका स्टाफ कहता है कि ऐसी कोई बात होती तो हमारे ध्यान में होती; यह कहते हुए उन्होंने एक मीटिंग जॉइन करने की बात कहकर जवाब खत्म कर दिया।

बरनाला में जमीनी स्तर पर आम जनता आज भी राम-भरोसे

दूसरी ओर, अस्पताल की एसएमओ द्वारा पीड़ित परिवार के दर्द को समझने और सख्त कार्रवाई करने के बजाय बेहद गोलमोल और गैर-जिम्मेदाराना जवाब देकर पल्ला झाड़ लेना प्रशासनिक नाकामी की जीती-जागती मिसाल है। अस्पताल प्रबंधकों का यह टालमटोल वाला रवैया खुद कई तरह के शक-शुबहे पैदा करता है और यह साबित करता है कि बरनाला में जमीनी स्तर पर आम जनता आज भी राम-भरोसे ही है।

एसी कमरों में सत्ता पक्ष के नेता और अफसरशाही: आम लोगों से हुई दूर

आज बरनाला के आम लोग पूरी तरह राम भरोसे दिन काटने को मजबूर हैं, क्योंकि जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े इस जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी कोई सुनवाई होती नजर नहीं आ रही। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक आम आदमी पार्टी के स्थानीय प्रतिनिधि और जिले के उच्च प्रशासनिक अधिकारी अपने आरामदायक एसी कमरों के अंदर बैठकर तमाशा देखते रहेंगे? क्या इन हाकिमों और अफसरों की जमीनी जिम्मेदारी खत्म हो चुकी है, जो जनता के दर्द को सुनने के लिए अपने ठंडे दफ्तरों से बाहर निकलने की जहमत तक नहीं उठा रहे हैं?

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