October 4, 2026

चंडीगढ़ में दौड़े 1000 से ज्यादा धावक, परमवीर चक्र विजेता सेखों की याद में हुई एयरफोर्स मैराथन

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चंडीगढ़ में दौड़े 1000 से ज्यादा धावक, परमवीर चक्र विजेता सेखों की याद में हुई एयरफोर्स मैराथन

चंडीगढ़ में दौड़े 1000 से ज्यादा धावक

Sekhon Marathon Chandigarh: चंडीगढ़ में रविवार को भारतीय वायु सेना की ओर से ‘सेखों इंडियन एयरफोर्स मैराथन 2026’ का आयोजन किया गया। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वायु सेना के परमवीर चक्र विजेता फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों की वीरता और शहादत को समर्पित इस मैराथन में 1,000 से अधिक धावकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इसमें वायु सेना के जवानों और उनके परिवारों के साथ पूर्व सैनिक, दिव्यांगजन, ट्राईसिटी के धावक और देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे प्रतिभागी शामिल रहे। मैराथन ने एक ओर जहां लोगों को फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर फ्लाइंग ऑफिसर सेखों के अदम्य साहस और देश के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद करने का अवसर भी दिया। सुबह के समय चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में धावक निर्धारित स्थान पर पहुंचे और अलग-अलग श्रेणियों में दौड़ का हिस्सा बने।

सेखों इंडियन एयरफोर्स मैराथन की शुरुआत चंडीगढ़ के सेक्टर-1 स्थित चंडीगढ़ क्लब के सामने ग्राउंड से हुई। सुबह होते ही यहां धावकों की चहल-पहल बढ़ गई थी। वायु सेना के जवानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी प्रतिभागियों में दौड़ को लेकर खास उत्साह नजर आया। आयोजकों ने प्रतिभागियों की सुरक्षा और दौड़ के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया। बड़ी संख्या में धावकों के सड़क पर उतरने के कारण चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने सुबह 4:30 बजे से 11 बजे तक कई प्रमुख मार्गों पर विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया। सुखना लेक, मटका चौक और पीजीआई की तरफ जाने वाले रूट पर यातायात को नियंत्रित किया गया, ताकि मैराथन का संचालन सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से हो सके।

 

 

21.1 किलोमीटर से 2 किलोमीटर तक कई श्रेणियों में हुई दौड़

मैराथन को अलग-अलग उम्र और शारीरिक क्षमता वाले प्रतिभागियों को ध्यान में रखते हुए कई श्रेणियों में आयोजित किया गया। सबसे लंबी दौड़ 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन रही, जिसमें प्रतिभागियों ने लंबी दूरी की चुनौती स्वीकार की। इसके अलावा 10 किलोमीटर ओपन रन, 5 किलोमीटर फिटनेस रन और 3 किलोमीटर फन रन भी आयोजित की गई। दिव्यांग प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 2 किलोमीटर की विशेष दौड़ भी रखी गई। इससे मैराथन सिर्फ प्रतिस्पर्धी दौड़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग आयु और क्षमता के लोगों को फिटनेस गतिविधि से जोड़ने का माध्यम बनी। मैराथन में वायु सेना के जवानों और उनके परिवारों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों के साथ दिव्यांगजनों ने भी दौड़ में हिस्सा लेकर फिटनेस और सहभागिता का संदेश दिया।

 

 

एयरफोर्स बैंड और कलाकारों की प्रस्तुति ने बढ़ाया उत्साह

दौड़ के दौरान प्रतिभागियों का उत्साह बनाए रखने के लिए भारतीय वायु सेना के विशेष बैंड ने प्रस्तुति दी। इसके साथ ही प्रसिद्ध कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से आयोजन में जोश भरा। सुबह की दौड़ के बीच संगीत और प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों और वहां मौजूद लोगों का उत्साह बढ़ाया। दौड़ पूरी करने वाले प्रतिभागियों और विजेताओं को उनकी उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को पदक, प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। इससे प्रतिभागियों में प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ आयोजन के प्रति उत्साह भी बढ़ा।

सेखों इंडियन एयरफोर्स मैराथन का उद्देश्य केवल दौड़ आयोजित करना नहीं था। इसके जरिए युवाओं में देशभक्ति की भावना को मजबूत करने, देश के वीर सैनिकों के बलिदान को याद करने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। आयोजन के जरिए ‘फिट इंडिया’ की भावना को भी बढ़ावा दिया गया। बड़ी संख्या में आम लोगों की भागीदारी ने यह दिखाया कि खेल और फिटनेस से जुड़ी गतिविधियां समाज के अलग-अलग वर्गों को एक साथ जोड़ सकती हैं। वहीं, भारतीय वायु सेना के वीर जवानों की कहानी से नई पीढ़ी को परिचित कराने का उद्देश्य भी इस आयोजन से जुड़ा रहा।

 

 

1971 की जंग में अकेले छह पाकिस्तानी विमानों से भिड़े थे सेखों

फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों भारतीय वायु सेना के इतिहास के सबसे साहसी योद्धाओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना जिले के गांव इसेवाल में हुआ था। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने श्रीनगर एयरबेस की रक्षा करते हुए असाधारण वीरता दिखाई थी। 14 दिसंबर 1971 को श्रीनगर एयरबेस पर पाकिस्तानी विमानों के हमले के दौरान सेखों ने अकेले छह पाकिस्तानी F-86 सैबर जेट्स का सामना किया। उन्होंने अपने फोलैंड नैट विमान से दुश्मन के एक विमान को मार गिराया, जबकि दूसरे विमान को क्षतिग्रस्त किया।

दुश्मन के विमानों का मुकाबला करते हुए फ्लाइंग ऑफिसर सेखों वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी असाधारण बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे भारतीय वायु सेना के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता अधिकारी हैं। चंडीगढ़ में आयोजित सेखों इंडियन एयरफोर्स मैराथन इसी वीर योद्धा की स्मृति को समर्पित रही। दौड़ में शामिल 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने फिटनेस के साथ देश के इस महान नायक के साहस और बलिदान को याद किया।

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