Sensex crash: भारतीय मुद्रा पर गुरुवार को वैश्विक बाजारों के दबाव का असर साफ दिखाई दिया। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी। इसका असर रुपये पर पड़ा और यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 रुपये प्रति डॉलर के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.71 प्रति डॉलर पर खुला था। कारोबार के दौरान यह 96.65 के उच्चस्तर और 96.79 के निचले स्तर तक पहुंचा। कारोबार खत्म होने पर रुपया 96.88 प्रति डॉलर पर रहा। बुधवार को भारतीय मुद्रा 96.75 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। डॉलर सूचकांक कई महीनों के ऊंचे स्तर के करीब कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट कच्चा तेल 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। रुपये में गिरावट का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है। खासतौर पर कच्चे तेल का आयात महंगा होने से देश के लिए डॉलर की मांग बढ़ती है। इसका दबाव लंबे समय तक बना रहा तो आयातित वस्तुओं की लागत और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर के पार, RBI के रुख पर बाजार की नजर
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने रुपये की चिंता बढ़ाई। ब्रेंट कच्चा तेल वायदा 4.20 प्रतिशत बढ़कर 104.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका को कीमतों में इस तेजी की बड़ी वजह माना गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने और रुपये के कमजोर पड़ने का दोहरा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। यही वजह है कि मुद्रा बाजार में कारोबारियों की नजर तेल की कीमतों और डॉलर की चाल पर बनी हुई है। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति रुपये के लिए नकारात्मक माहौल बना सकती है। उनके मुताबिक मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रुपये पर दबाव डाल सकती है।
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को निचले स्तर पर कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों की नजर अमेरिकी डॉलर-रुपये की जोड़ी में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए RBI की संभावित कार्रवाई पर भी है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा था कि केंद्रीय बैंक रुपये को उसका उचित मूल्य हासिल करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा था कि RBI यह सुनिश्चित करेगा कि रुपया स्थिर रहे, उसे सही मूल्य मिले और इस प्रक्रिया में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ने में समर्थन दिया जाए। साथ ही अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने पर भी जोर दिया जाएगा।
डॉलर इंडेक्स चढ़ा, शेयर बाजार में भी भारी गिरावट
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.16 प्रतिशत बढ़कर 102.40 पर पहुंच गया। डॉलर की मजबूती आमतौर पर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ाती है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। बाजार की नजर अब अमेरिका से जारी होने वाले साप्ताहिक बेरोजगारी दावे के आंकड़ों पर भी रहेगी। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और आगे के संकेत भी रुपये और वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। घरेलू शेयर बाजार में भी गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1,045.46 अंक टूटकर 71,593.24 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 371.25 अंक की गिरावट के साथ 22,231.80 अंक पर रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 6,121.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार और रुपये पर दबाव बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है। रुपये की आगे की चाल में अब कच्चे तेल की कीमत, डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और RBI के हस्तक्षेप की भूमिका अहम रहेगी। अगर भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है, जबकि RBI की सक्रियता गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकती है।

