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Shani Sadesati: मेष, मीन और कुंभ: शनि की साढ़ेसाती के चक्रव्यूह में फंसी तीन राशियां,जानें कैसे बचें

AAmandeep Singh
मेष, मीन और कुंभ: शनि की साढ़ेसाती के चक्रव्यूह में फंसी तीन राशियां,जानें कैसे बचें
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ज्योतिष। ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती को जीवन का सबसे कठिन पड़ाव माना जाता है। साल 2026 के अंत तक ये तीनों राशियां शनि के कड़े अनुशासन और प्रभाव में रहने वाली हैं। चूंकि शनि इस वक्त गुरु की राशि मीन में गोचर कर रहे हैं, इसलिए मेष राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का प्रथम चरण शुरू हो चुका है, जिसे ‘चढ़ती साढ़ेसाती’ भी कहा जाता है। इसमें अक्सर व्यर्थ की भागदौड़ और मानसिक व्याधि बढ़ती है।

वहीं, मीन राशि के जातक इस समय साढ़ेसाती के दूसरे और सबसे प्रभावकारी चरण से गुजर रहे हैं। इसे ‘शिखर चरण’ कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति को पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। तीसरी ओर, कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का अंतिम या तीसरा चरण चल रहा है। इसे ‘उतरती साढ़ेसाती’ कहते हैं, जो जाते-जाते कुछ राहत तो देती है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर सचेत रहने की चेतावनी भी देती है।

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कर्म प्रधान हैं शनि: इन गलतियों से बचें

शनि देव को दंडाधिकारी कहा जाता है, यानी वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। साढ़ेसाती के इस मुश्किल वक्त में कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना अनिवार्य है: गरीबों का अपमान न करें: शनि कमजोर और असहाय लोगों के प्रतिनिधि हैं। किसी भी जरूरतमंद या मजदूर को परेशान करना शनि के क्रोध को न्योता देना है।

अहंकार से दूरी: इस अवधि में वाणी पर संयम रखें। किसी का दिल दुखाना या पद का दुरुपयोग करना भारी पड़ सकता है।

ईमानदारी का मार्ग: अनैतिक कार्यों या शॉर्टकट से धन कमाने की कोशिश इस समय बड़े कानूनी पचड़े में डाल सकती है।

दुष्प्रभाव कम करने के अचूक उपाय

अगर आप भी इन तीन राशियों में से एक हैं और शनि के नकारात्मक प्रभाव महसूस कर रहे हैं, तो शास्त्रों में वर्णित ये उपाय आपको सुरक्षा कवच प्रदान कर सकते हैं:

सेवा और दान: शनिवार के दिन काले तिल, काला कंबल या लोहे की वस्तुओं का दान करें। सामर्थ्य अनुसार भूखे लोगों को भोजन कराना शनि देव को अति प्रसन्न करता है।

हनुमान जी की शरण: मान्यता है कि जो भक्त नियमित रूप से ‘हनुमान चालीसा’ या ‘सुंदरकांड’ का पाठ करते हैं, उन पर शनि देव कभी अपनी कुदृष्टि नहीं डालते। हनुमान जी की पूजा शनि के दोषों को हर लेती है।

पीपल की पूजा: प्रत्येक शनिवार को सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से करियर और व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

आचरण में सुधार: अपने अधीनस्थों या घर के नौकरों के साथ मधुर व्यवहार रखें। उन्हें उपहार या बोनस देना शनि को शांत करने का एक आधुनिक और प्रभावी तरीका है।

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