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Shashi Tharoor Cockroach Janata Party: बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' कहने से भड़का गुस्सा, थरूर ने बताया क्यों देश के युवा जुड़ रहे इस आंदोलन से

AAmandeep Singh
बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' कहने से भड़का गुस्सा, थरूर ने बताया क्यों देश के युवा जुड़ रहे इस आंदोलन से
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दिल्ली। देश में बढ़ती बेरोजगारी, पेपर लीक और खराब सिस्टम के खिलाफ भारतीय सोशल मीडिया पर सुनामी की तरह उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अब देश के सियासी गलियारों में बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। अपनी बेबाक राय के लिए मशहूर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने इस ऐतिहासिक डिजिटल आंदोलन पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया साझा की है। थरूर ने कहा कि वे इस नए ऑनलाइन मूवमेंट की अभूतपूर्व पहुंच और इसके पीछे छिपे भारतीय युवाओं के दर्द से काफी प्रभावित हैं। हाल ही में इस पार्टी के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट को भारत में ब्लॉक किए जाने पर गहरी नाराजगी जताते हुए थरूर ने इसे युवाओं की आवाज को दबाने का एक बेहद तानाशाही पूर्ण कदम करार दिया है।

‘सिर्फ 5 दिन में डेढ़ करोड़ फॉलोअर्स होना कोई मामूली गुस्सा नहीं’

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शशि थरूर ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस आंदोलन के हैरान करने वाले नेशनल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए लिखा कि महज पांच दिनों के भीतर इंस्टाग्राम पर 1.5 करोड़ (जो अब 1.8 करोड़ पार कर चुका है) से ज्यादा लोगों का इस पेज से जुड़ना कोई आम बात नहीं है। यह ऐतिहासिक आंकड़ा इस बात का सीधा सबूत है कि भारत का पढ़ा-लिखा युवा मौजूदा रोजगार नीतियों, सरकारी भर्तियों में धांधली और मुख्यधारा के नेताओं से किस कदर निराश और खफा है। थरूर ने स्पष्ट किया कि जब युवाओं को अपनी बात रखने का कोई सीधा मंच नहीं मिलता, तो वे इस तरह के अनूठे और तीखे डिजिटल व्यंग्य का सहारा लेते हैं। भारतीय लोकतंत्र की पहचान यही है कि वहां युवाओं के विरोध, हास्य, पैरोडी और नाराजगी को कुचलने के बजाय उन्हें खुलकर सुनने का माद्दा होना चाहिए।

भारत के मुख्यधारा के विपक्ष के लिए ‘वेक-अप कॉल’ और बड़ा सियासी मौका

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपे अपने एक ताजा लेख में शशि थरूर ने इस डिजिटल आंदोलन का गहरा राजनीतिक विश्लेषण भी किया है। उन्होंने भारत के तमाम मुख्यधारा के विपक्षी दलों को सचेत करते हुए कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की यह अभूतपूर्व लोकप्रियता दर्शाती है कि आम भारतीय युवाओं के भीतर मौजूदा व्यवस्था के प्रति कितना तीखा आक्रोश भरा पड़ा है। थरूर के मुताबिक, यह माहौल पूरे विपक्ष के लिए एक बड़ा और स्पष्ट संदेश है कि वे जनता की इस नब्ज को पहचानें। अगर देश का विपक्ष इस युवाओं की डिजिटल हताशा को सही ढंग से जमीन पर संगठित करने में नाकाम रहता है, तो यह उसकी अपनी राजनीतिक विफलता होगी।

सोशल मीडिया की यह भड़ास क्या 2026 के बड़े वोट बैंक में बदलेगी?

अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे 30 साल के भारतीय डिजिटल स्ट्रैटेजिस्ट अभिजीत दीपके द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन के भविष्य पर भी थरूर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “मुझे यह नहीं मालूम कि इंटरनेट की यह लहर आगे चलकर कितनी लंबी टिकेगी, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि इस मूवमेंट से जुड़े करोड़ों भारतीय युवा अपनी इस रचनात्मक ऊर्जा और गुस्से को मुख्यधारा की राजनीति में लेकर आएंगे।” थरूर ने आगे जोड़ा कि यदि यह डिजिटल युवा फौज आने वाले चुनावों में अपने इस आक्रोश को वोट की चोट में बदलने में कामयाब हो गई, तो देश की किसी भी सरकार या बड़ी राजनीतिक पार्टी के लिए इस ‘जिद्दी झुंड’ को नजरअंदाज करना नामुमकिन हो जाएगा।

चीफ जस्टिस का बयान और कॉकरोच बनने की अनोखी शर्तें

आपको बता दें कि इस पूरे सिलसिले की शुरुआत 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की एक अदालती सुनवाई के दौरान हुई थी, जहां रिपोर्ट्स के मुताबिक चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रोजगार न मिलने पर एक्टिविस्ट और सोशल मीडिया पर लिखने वाले कुछ युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से कर दी थी। इसी अपमान को देश के युवाओं ने अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया और एक ऐसी व्यंग्यात्मक डिजिटल पार्टी खड़ी कर दी जिसके नियम बेहद मजेदार हैं। इस पार्टी का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार का पूरी तरह बेरोजगार होना, परम आलसी होना, चौबीसों घंटे इंटरनेट पर एक्टिव रहना और बेहद सलीके से व्यवस्था के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने में माहिर होना जरूरी है। इसी अनोखे मिजाज ने इस समय पूरे भारत के युवाओं को अपने आगोश में ले रखा है।

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