SIR Controversy: चुनाव आयोग (EC) के भीतर अधिकारियों के कामकाज के बंटवारे को लेकर विवाद की जानकारी RTI से सामने आई है। रिटायर्ड कमोडोर लोकेश के. बत्रा को मिले जवाब के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ कैबिनेट सचिवालय में शिकायत की थी। दोनों ने 29 जुलाई 2026 को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मनीष गर्ग ने चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे में बदलाव का आदेश जारी किया। इस बदलाव को लेकर मतदाता सूची से जुड़े आईटी सिस्टम की निगरानी और उसके संचालन के केंद्रीकरण पर भी सवाल उठाए गए थे।
कैबिनेट सचिवालय ने कार्रवाई से क्यों परहेज किया?
RTI से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय की 3 अगस्त की फाइल नोटिंग में शिकायतों की प्रकृति पर सवाल उठाया गया। इसमें कहा गया कि पत्र पूरे चुनाव आयोग की ओर से नहीं, बल्कि दो चुनाव आयुक्तों ने व्यक्तिगत रूप से भेजे थे। ऐसे में शिकायतों पर कार्रवाई करना आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप माना जा सकता था। कैबिनेट सचिवालय ने शिकायतों पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की। दोनों चुनाव आयुक्तों को उनके पत्र मिलने की सूचना दी गई। साथ ही, शिकायतों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को भी भेजी गईं। इस मामले में एक अहम घटनाक्रम 30 जुलाई 2026 को हुआ। शिकायत भेजने के अगले ही दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने मनीष गर्ग के कामकाज के बंटवारे से संबंधित आदेश रद्द कर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि आयोग के भीतर बदलाव को लेकर सहमति बनने तक पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी।
2024 में चुनाव आयोग में नियुक्त हुए थे मनीष गर्ग
मनीष गर्ग 1996 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। अगस्त 2024 में केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने उन्हें चुनाव आयोग में उप चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। उन्होंने 2 सितंबर 2024 को पद संभाला था। इससे पहले वह हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के तौर पर काम कर चुके थे। गर्ग का नाम मतदाता सूची के आईटी सिस्टम के संचालन और निर्वाचन अधिकारियों को इस सिस्टम तक पहुंच मिलने से जुड़े विवाद में भी सामने आया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने ERONet सॉफ्टवेयर पर निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए थे। संधू की चिंता थी कि कई निर्वाचन अधिकारियों को सिस्टम का पूरा एक्सेस नहीं मिल रहा था। इससे मतदाता सूची से जुड़े उनके वैधानिक काम प्रभावित होने की आशंका थी। ताजा शिकायतों में भी मतदाता सूची के आईटी सिस्टम की निगरानी और कामकाज के केंद्रीकरण का मुद्दा शामिल था।
10 महीने में 14 बार आपत्ति जताने की रिपोर्ट
25 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने के दौरान आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची के डेटा पर नियंत्रण और अधिकारियों को जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया गया था। RTI से सामने आई शिकायतें इसी व्यापक विवाद के बीच आई हैं। हालांकि, शिकायतों में लगाए गए आरोपों और कैबिनेट सचिवालय की फाइल नोटिंग को अलग-अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय ने शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की, जबकि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले ही दिन संबंधित आदेश रद्द कर पुरानी व्यवस्था जारी रखने का निर्देश दिया।

