SIR Protest Delhi: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में शुक्रवार को लेफ्ट समर्थित संगठनों और नागरिक समूहों ने प्रदर्शन किया। बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास जुटे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के पोस्टर लहराए और उनके इस्तीफे की मांग की। इस दौरान ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ के नारे भी लगाए गए। प्रदर्शन का आह्वान पीपल अगेंस्ट SIR और छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने किया था। आयोजकों ने बंगला साहिब गुरुद्वारे से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में ही रोक लिया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन करीब तीन घंटे तक चला। प्रदर्शन के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की नेता एनी राजा ने कहा कि वे केंद्र के उन तरीकों के खिलाफ आवाज उठाने आए हैं, जिन्हें वह लोकतंत्र को कमजोर करने वाला मानती हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसे प्रयासों का विरोध जरूरी है।
22 दिनों में 10 पार्टियां और संगठन कर चुके हैं विरोध

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 22 दिनों में कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं। इस दौरान INDIA ब्लॉक से जुड़े दलों, आम आदमी पार्टी, वामपंथी संगठनों, AISA, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), नागरिक अधिकार समूहों और अन्य संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। कुल मिलाकर 10 पार्टियां और संगठन इस मुद्दे पर सड़कों पर उतर चुके हैं। SIR के विरोध को एक साझा मंच देने के लिए ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ का गठन पिछले सप्ताह किया गया था। इस मंच में नागरिकों के साथ किसान यूनियनों, मजदूर संगठनों और महिला व युवा संगठनों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य SIR के खिलाफ चल रहे विरोध को एकजुट करना है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि SIR की प्रक्रिया वापस ली जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें। वहीं, इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शनों के साथ-साथ पुलिस कार्रवाई और अदालतों में चल रही कानूनी कार्यवाही भी चर्चा में है।
सौरव दास और आशुतोष रांका को दोबारा नोटिस भेज सकती है पुलिस

SIR विरोध से जुड़े मामलों में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कॉकरोच पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए दोबारा नोटिस भेज सकती है। पुलिस ने दोनों को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए। दोनों ने पुलिस से अतिरिक्त समय मांगा है। इससे पहले बुधवार को दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया था। दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दोनों को हिरासत में लिया था। विवाद की शुरुआत तब हुई, जब सरकार ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था। इसके बावजूद 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका तिरंगा लेकर वहां पहुंचे। उन पर शांति संबंधी नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा और उन्हें पांच दिन के लिए जेल भेज दिया गया। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी।
जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को

दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दर्ज दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। ये मामले 13 अक्टूबर को दोनों नेताओं के कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर जाने से जुड़े हैं। कनॉट प्लेस से संबंधित मामला 20 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। इसके बाद जंतर-मंतर वाले मामले की जांच भी इसी शाखा को दे दी गई। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि नेताओं को पहले मजिस्ट्रेट के फैसले का इंतजार करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर ऊपरी अदालत का रुख करना चाहिए।

वहीं, AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर भी दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आने की बात कही गई है। बोरा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका भरने और एक जमानतदार देने को कहा गया था। इस याचिका पर अदालत का फैसला मामले की आगे की कानूनी स्थिति तय करने में अहम होगा। SIR के विरोध में जारी प्रदर्शनों के बीच अब राजनीतिक मांगों के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और उससे जुड़े कानूनी मामलों पर भी नजर बनी हुई है।

