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Slovenian tourist India visit: दुनिया से कई साल आगे है भारत'— चाय की टपरी पर UPI देख दंग रह गई स्लोवेनिया की महिला टूरिस्ट

AAmandeep Singh
Slovenian tourist India visit:  दुनिया से कई साल आगे है भारत'— चाय की टपरी पर UPI देख दंग रह गई स्लोवेनिया की महिला टूरिस्ट
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नई दिल्ली। भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेषकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज सिर्फ देश के नागरिकों की सहूलियत का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह दुनिया भर से आने वाले सैलानियों के लिए कौतूहल और तारीफ का विषय बन चुका है। हालिया मामला स्लोवेनिया से भारत घूमने आई एक महिला टूरिस्ट जूलिया का है, जिनका भारत में कैशलेस पेमेंट को लेकर किया गया अनुभव इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। जूलिया ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत का यह डिजिटल भुगतान तंत्र दुनिया के कई बड़े और विकसित मुल्कों से तकनीक के मामले में कोसों आगे है।

चाय की टपरी से लेकर लोकल मार्केट तक, बस एक स्कैन और काम खत्म

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दरअसल, जूलिया अपने ‘गैप ईयर’ (पढ़ाई या नौकरी के बीच का ब्रेक) के दौरान भारत भ्रमण पर निकली थीं। अपनी इस यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभवों को इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि भारत में कदम रखने के बाद जिस चीज ने उन्हें सबसे ज्यादा हैरान किया, वो था जेब में बिना नगदी (कैश) रखे पूरे देश में बेफिक्र होकर घूम पाना।

जूलिया लिखती हैं, “मैं भारत में जहां भी गई, चाहे वो सड़क किनारे की कोई छोटी सी चाय की टपरी हो, कोई ढाबा हो या फिर भीड़भाड़ वाला स्थानीय बाजार, मुझे कहीं भी छुट्टा पैसों या भारी-भरकम कैश रखने की झंझट नहीं झेलनी पड़ी। हर छोटी-बड़ी दुकान पर लोग बस दीवार या डिब्बे पर चिपके एक क्यूआर (QR) कोड की तरफ इशारा कर देते थे। न कोई बैंक डिटेल टाइप करने का झंझट और न ही कार्ड स्वाइप करने की कसरत; बस फोन निकालो, स्कैन करो और चंद सेकंड में भुगतान सफल।” जूलिया ने इसे दुनिया का सबसे आसान और यूजर-फ्रेंडली सिस्टम बताया।

विदेशी पर्यटकों को सलाह और आईएमएफ (IMF) की मुहर

हालांकि, अपने इस शानदार अनुभव के बीच जूलिया ने भारत आने वाले अन्य विदेशी सैलानियों को एक व्यावहारिक सलाह भी दे डाली। उन्होंने कहा कि सुदूर इलाकों या छोटे कस्बों में कभी-कभी खराब मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट न चलने की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए बैकअप के तौर पर थोड़ा-बहुत कैश पास में रखना समझदारी होगी।

गौरतलब है कि भारत की इस डिजिटल क्रांति का लोहा वैश्विक मंचों पर भी माना जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी अपनी रिपोर्ट्स में इस बात को स्वीकार किया है कि रियल-टाइम ट्रांजैक्शन (तत्काल लेनदेन) के मामले में भारत का यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सुरक्षित फास्ट पेमेंट नेटवर्क बनकर उभरा है।

‘बिना UPI के विदेशों में डर लगता है’— नेटिजन्स के मजेदार रिएक्शंस

जूलिया की यह पोस्ट जैसे ही वायरल हुई, भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट सेक्शन को अपने मजेदार और तार्किक विचारों से पाट दिया। कई जागरूक यूजर्स ने जूलिया को यह तकनीकी ज्ञान भी दिया कि भारत में अब बिना इंटरनेट के भी (USSD कोड या लाइट वॉलेट के जरिए) यूपीआई भुगतान संभव है।

वहीं, एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा, “अगर मैं कभी पश्चिमी देशों (Western Countries) की यात्रा पर गया, तो मुझे दो ही चीजों का सबसे बड़ा खौफ सताएगा— पहला वहां टॉयलेट में पानी न होना और दूसरा यूपीआई की सुविधा का गायब होना।” एक अन्य यूजर ने लिखा कि यूपीआई की सबसे खूबसूरत बात यह है कि पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे दुकानदार के बैंक खाते में जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।

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