Sonia Gandhi X post: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पहला पोस्ट साझा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपनी प्रेम कहानी की शुरुआत से जुड़ी यादें ताजा कीं। शनिवार को बनाए गए अपने अकाउंट पर उन्होंने अपनी आगामी किताब Belonging: A Journey of Love का वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने बताया कि इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान वह अपनी पसंद का खाना मिलने वाली जगह तलाश रही थीं। इसी तलाश के दौरान उन्हें कैम्ब्रिज में एक ग्रीक रेस्तरां मिला, जहां एक दोस्त ने उनकी मुलाकात राजीव गांधी से कराई थी।
सोनिया गांधी ने उस पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा कि उन्हें लगभग तुरंत महसूस हो गया था कि राजीव गांधी ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह अपनी जिंदगी बिताना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव भी उनके बारे में ऐसा ही महसूस करते थे। इस मुलाकात के बाद दोनों दोस्त बन गए और धीरे-धीरे उनका रिश्ता गहरा होता गया। सोनिया के मुताबिक, दोनों पार्टियों में जाते, घूमते और छात्रों की बैठकों में साथ समय बिताते थे। उन्होंने राजीव गांधी के व्यक्तित्व का जिक्र करते हुए कहा कि वह बेहद सौम्य स्वभाव के थे। सोनिया ने यह भी कहा कि राजीव अच्छे दिखते थे, लेकिन उनके व्यक्तित्व की सबसे खास बात उनका सहज और सौम्य व्यवहार था। अपनी प्रेम कहानी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए सोनिया ने कहा कि यहीं से प्यार की शुरुआत हुई और दोनों ने मिलकर यादों से भरी एक दुनिया बनाई। उनका यह पोस्ट उनकी निजी जिंदगी के उस दौर की झलक देता है, जब राजनीति और सार्वजनिक जीवन से दूर दोनों के रिश्ते की शुरुआत हुई थी।
10 नवंबर को लॉन्च होगी सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging’
सोनिया गांधी की आगामी किताब Belonging: A Journey of Love में उनके जीवन के कई अहम पड़ावों का वर्णन किया गया है। पुस्तक की शुरुआत युद्ध के बाद इटली के वेनेटो क्षेत्र में बीते उनके बचपन से होती है। इसके बाद इसमें इंग्लैंड के कैम्ब्रिज जाने, वहां राजीव गांधी से मुलाकात और फिर उनके साथ जीवन बिताने के फैसले तक की कहानी शामिल है। किताब 10 नवंबर को लॉन्च होगी। पुस्तक में सोनिया गांधी ने अपने शुरुआती जीवन और उन अनुभवों को समेटा है, जिन्होंने उन्हें इटली से भारत तक के सफर में बदलते माहौल के साथ तालमेल बैठाने में मदद की। इसमें राजीव गांधी से उनकी शादी, उनकी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात तथा नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने के अनुभवों का भी उल्लेख है।
किताब में भारत आने के बाद नई संस्कृति को अपनाने से जुड़े अनुभव भी शामिल हैं। इनमें हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय खानपान तथा जीवनशैली से परिचित होना शामिल है। सोनिया के जीवन का यह दौर उनके लिए एक नए देश, भाषा और सामाजिक परिवेश के साथ जुड़ने का समय था। पुस्तक में निजी जीवन के साथ-साथ उन घटनाओं का भी जिक्र है, जिन्होंने गांधी परिवार को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। इनमें संजय गांधी की विमान हादसे में मौत, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या जैसी त्रासदियां शामिल हैं। इन घटनाओं के बाद सोनिया गांधी और उनके परिवार की जिंदगी में बड़े बदलाव आए।
राजीव गांधी की हत्या के बाद राजनीति से दूर रहीं सोनिया
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। उस समय कांग्रेस की कमान पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार के दौर में आगे बढ़ी। अगले कुछ वर्षों में कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौतियां बढ़ीं और पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों को लेकर चर्चाएं होने लगीं। 1997 में सोनिया गांधी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली। इसके बाद मार्च 1998 में उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने 2017 तक इस पद पर काम किया और कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले नेताओं में शामिल हुईं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने संगठन को मजबूत करने और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश की। सोनिया गांधी का राजनीति में प्रवेश ऐसे समय हुआ, जब कांग्रेस को नेतृत्व और संगठन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, राजीव गांधी की हत्या के बाद उनका राजनीति से दूर रहना और बाद में पार्टी की जिम्मेदारी संभालना उनके जीवन के दो अलग-अलग चरण रहे। उनकी आगामी किताब में निजी जीवन के साथ सार्वजनिक जिम्मेदारियों के बीच हुए बदलावों का भी वर्णन किया गया है।
2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया, मनमोहन सिंह बने PM
सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन का एक बड़ा घटनाक्रम 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद सामने आया। उस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने जीत हासिल की और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंचा। कांग्रेस ने सहयोगी दलों के साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) बनाया। गठबंधन को वाम दलों समेत कई दलों का समर्थन मिला। चुनाव के बाद सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया था, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का रास्ता साफ हुआ। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में UPA सरकार ने 2004 से 2014 तक दो कार्यकाल पूरे किए।
उस समय सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था। भाजपा और NDA के नेताओं ने उनके प्रधानमंत्री बनने पर सवाल उठाए थे। हालांकि, सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद से पीछे हटने का फैसला किया और मनमोहन सिंह के नाम का समर्थन किया। बाद में वह UPA की अध्यक्ष के रूप में गठबंधन की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहीं। डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब The Accidental Prime Minister में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने और उस दौर के राजनीतिक घटनाक्रम का वर्णन किया था। इस किताब पर बाद में इसी नाम से फिल्म भी बनी। सोनिया गांधी की आगामी पुस्तक में भी 2004 के चुनाव के बाद के घटनाक्रम का जिक्र होने की बात कही गई है।
निजी यादों से राजनीतिक सफर तक की कहानी
Belonging: A Journey of Love में सोनिया गांधी के जीवन को बचपन, प्रेम, विवाह, परिवार और राजनीति से जुड़े विभिन्न पड़ावों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से मुलाकात से शुरू हुई कहानी आगे चलकर भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित परिवारों में से एक का हिस्सा बनने तक पहुंचती है। राजीव गांधी के साथ उनके रिश्ते, इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात, भारत में जीवन के साथ तालमेल बैठाने के अनुभव और परिवार पर आई त्रासदियों का वर्णन इस पुस्तक के अहम हिस्से हैं। इसके साथ ही 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले जैसे राजनीतिक घटनाक्रम भी इसमें शामिल हैं। X पर अपने पहले पोस्ट के जरिए सोनिया गांधी ने पुस्तक के निजी और भावनात्मक पक्ष की झलक साझा की है। 10 नवंबर को पुस्तक के लॉन्च के बाद उनके जीवन के इन अनुभवों और घटनाओं के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
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