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Thought of the day: जब टूटने लगे हौसला तो याद करें स्टीव जॉब्स की यह बात, हर नाकामी लगेगी छोटी

GGaganpreet Kaur
जब टूटने लगे हौसला तो याद करें स्टीव जॉब्स की यह बात, हर नाकामी लगेगी छोटी
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आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी और बेतहाशा कॉम्पिटिशन के बीच अक्सर ऐसे मोड़ आते हैं जब इंसान भीतर से पूरी तरह टूट जाता है। दिन-रात की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद भी जब नतीजे मनमुताबिक नहीं मिलते या कोई बेहद करीबी साथ छोड़ देता है, तो अवसाद हावी होने लगता है। ऐसे ही मुश्किल दौर से जूझ रहे लोगों के लिए दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक, एप्पल (Apple) के कर्ता-धर्ता रहे स्टीव जॉब्स का एक पुराना बयान आज सोशल मीडिया और कॉरपोरेट जगत में टॉनिक का काम कर रहा है। जॉब्स ने अपने जीवन के अनुभवों को समेटते हुए एक बार कहा था, “कभी-कभी जिंदगी आपको ईंट से सिर पर मारेगी। लेकिन याद रखना, तब भी आपको अपना भरोसा नहीं खोना है।”

ठोकरें गिराने के लिए नहीं, संभलकर चलने के लिए लगती हैं

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स्टीव जॉब्स का यह फलसफा कोई किताबी ज्ञान नहीं है, बल्कि उन्होंने खुद अपनी जिंदगी में ऐसे उतार-चढ़ाव देखे थे जब उन्हें अपनी ही बनाई कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि मुश्किलें हर इंसान के सफर का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। इस दुनिया में ऐसा कोई कामयाब शख्स नहीं हुआ जिसे कभी रिजेक्शन या नाकामी का मुंह न देखना पड़ा हो। सारा खेल इस बात का है कि आप उस झटके को झेलते कैसे हैं। कुछ लोग परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं और अवसाद की गर्त में चले जाते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हीं ठोकरों को सीढ़ी बनाकर कामयाबी के शिखर तक पहुंच जाते हैं।

जब दुनिया पीठ फेर ले, तब खुद का हाथ थामना जरूरी

जब चारों तरफ से सिर्फ बुरी खबरें आ रही हों और हर दांव उल्टा पड़ता दिख रहा हो, तो उस वक्त सबसे पहली चोट इंसान के आत्मविश्वास पर लगती है। लोग अक्सर समाज के तानों, दोस्तों की तरक्की और अपनी तात्कालिक असफलताओं के बोझ तले दबकर खुद की क्षमताओं पर शक करने लगते हैं।

इस विषय पर जीवन प्रबंधन के जानकारों का कहना है:

“कामयाबी की पहली शर्त ही यही है कि जब पूरी दुनिया आपकी काबिलियत पर उंगली उठाए, तब भी आपके भीतर की आवाज मजबूत होनी चाहिए। यदि आपको अपनी मेहनत और अपनी नीयत पर पूरा भरोसा है, तो आप इतिहास का सबसे खराब दौर भी हंसते-हंसते काट लेंगे।”

असफलता फुलस्टॉप नहीं, बल्कि एक नया पैराग्राफ है

आज के युवा अक्सर एक प्रवेश परीक्षा में फेल होने या एक बिजनेस आइडिया फ्लॉप होने को ही जिंदगी का अंत मान बैठते हैं। जबकि सच इसके ठीक उलट है। हर असफलता असल में यह बताती है कि प्रयासों में कहां कमी रह गई थी। जो इंसान अपनी पुरानी गलतियों का ईमानदारी से पोस्टमार्टम करता है, वह अगली बार दोगुनी ताकत और समझदारी के साथ मैदान में उतरता है। हार से डरकर मैदान छोड़ भागने के बजाय, क्रीज पर टिके रहना ही समझदारी है।

कछुए की चाल ही सही, लेकिन चलते रहना जरूरी है

इतिहास गवाह है कि जितने भी बड़े आविष्कार हुए या जितने भी बड़े साम्राज्य खड़े किए गए, उनके पीछे एक दिन की किस्मत नहीं बल्कि सालों का कड़ा संघर्ष और जिद थी। मंजिल तक सिर्फ वही लोग पहुंच पाते हैं जो आंधियों के बीच भी अपने पैर जमाए रखते हैं। स्टीव जॉब्स का यह विचार आज के दौर में हर उस व्यक्ति के लिए एक चेतावनी भी है और दिलासा भी, जो इस वक्त जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता; बुरा समय बीत जाएगा, बशर्ते आप उस दौरान अपना धैर्य और आत्मसम्मान बचाए रखें।

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