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Summer Gardening Tips India: क्या तेज गर्मी से मुरझा रहे हैं आपके कीमती पौधे? मिट्टी में नमी बनाए रखने की 5 जादुई ट्रिक्स

GGaganpreet Kaur
क्या तेज गर्मी से मुरझा रहे हैं आपके कीमती पौधे? मिट्टी में नमी बनाए रखने की 5 जादुई ट्रिक्स
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लाइफस्टाइल। जैसे ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस पार करता है, छतों और बालकनी में रखे पौधों का दम टूटने लगता है। कंक्रीट के मकानों के बीच गमलों की सीमित मिट्टी बहुत तेजी से अपनी नमी खो देती है। ऐसे में कई शौकिया बागबान (गार्डनर्स) घबराकर दिन में तीन-चार बार पौधों में पानी उड़ेल देते हैं, जिससे मिट्टी ‘दलदल’ बन जाती है और जड़ें दम तोड़ देती हैं। अनुभवी बागबानों का मानना है कि गर्मियों में गार्डनिंग का विज्ञान थोड़ा अलग है। यहां मकसद गमले को पानी से भरना नहीं, बल्कि मिट्टी के भीतर एक ऐसा अनुकूल माहौल तैयार करना है जिससे जड़ें धीरे-धीरे और लगातार पानी सोखती रहें। इसके लिए बाजार से महंगे केमिकल या टूल्स लाने की कतई जरूरत नहीं है, आपकी रसोई और कबाड़ में ही इसका पूरा इलाज छिपा है।

नमी रोकने के स्वदेशी उपाय: सूखी पत्तियां और बोतल का जादू

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गर्मियों में पौधों को वेंटिलेटर से बाहर निकालने और उन्हें लंबी जिंदगी देने के लिए ये पांच व्यावहारिक तरीके बेहद कारगर साबित होते हैं:

सूखी पत्तियों की सुरक्षा परत (मल्चिंग): प्रकृति जंगलों में अपनी मिट्टी की रक्षा खुद करती है। इसी तर्ज पर अपने गमलों की मिट्टी के ऊपर सूखी पत्तियां, कतरन, घास या नारियल के जूट (छिलके) की दो इंच मोटी परत बिछा दें। यह परत सीधी धूप को मिट्टी पर पड़ने नहीं देती, जिससे पानी भाप बनकर जल्दी नहीं उड़ता और मिट्टी में 48 घंटे तक नमी बनी रहती है।

प्लास्टिक की बेकार बोतलों से ‘ड्रिप इरिगेशन’: अगर आप कामकाजी हैं और दोपहर में पौधों की फिक्र सताती है, तो यह जुगाड़ बेस्ट है। कोल्ड ड्रिंक की एक पुरानी प्लास्टिक बोतल लें, उसकी तली या ढक्कन के पास सुई से बेहद बारीक छेद करें और उसे पानी से भरकर गमले की मिट्टी में थोड़ा दबाकर उल्टा खड़ा कर दें। इससे बूंद-बूंद पानी सीधे जड़ों तक रिसता रहेगा और दोपहर की मार से पौधा बच जाएगा।

कोकोपीट और पुरानी खाद का गणित: मिट्टी तैयार करते समय ही उसमें नारियल के बुरादे से बना ‘कोकोपीट’ या सूखी गोबर की पुरानी खाद जरूर मिलाएं। कोकोपीट अपने वजन से चार गुना ज्यादा पानी होल्ड करने की ताकत रखता है, जो मिट्टी को स्पंज जैसा मुलायम और नम बनाए रखता है।

गोड़ाई की अहमियत और धूप का प्रबंधन

पौधों को स्वस्थ रखने के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार खुरपी से गमले की ऊपरी मिट्टी को हल्का ढीला (गोड़ाई) जरूर करें। ऐसा करने से मिट्टी के भीतर हवा का संचरण (ऑक्सीजन का प्रवाह) बेहतर होता है और पानी सीधे नीचे तक जाता है।

बागवानी विशेषज्ञों की विशेष सलाह: “गर्मियों में पानी देने के समय का अनुशासन सबसे बड़ा फैक्टर है। जब धूप तेज हो, तब पानी देने से गमले की मिट्टी खौलने लगती है, जिससे जड़ें जल जाती हैं। इसके अलावा, जो पौधे नाजुक हैं या इंडोर वैरायटी के हैं, उन्हें दोपहर की सीधी धूप से बचाकर हरे रंग के नेट (Green Net) के नीचे या किसी छायादार कोने में शिफ्ट कर देना चाहिए। पत्तियों पर सुबह-सुबह सादे पानी का छिड़काव (शॉवर) करने से उनका तापमान नियंत्रित रहता है।”

इन छोटे और बिना लागत वाले बदलावों को अपनाकर आप देखेंगे कि जो पौधे तेज धूप के कारण दम तोड़ रहे थे, वे फिर से नई कोपलों और हरियाली के साथ लहलहाने लगेंगे।

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