ज्योतिष। ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल एक बार फिर बड़ा उलटफेर करने वाली है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में सूर्य और देवगुरु बृहस्पति एक ऐसी स्थिति में आ रहे हैं, जिसे ज्योतिषीय गणना में ‘केंद्र दृष्टि योग’ कहा जाता है। 9 अप्रैल को बनने वाला यह संयोग मानवीय स्वभाव और किस्मत पर सीधा प्रहार करेगा। जहाँ सूर्य को ग्रहों का राजा और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है, वहीं बृहस्पति ज्ञान और सौभाग्य के कारक हैं। जब ये दोनों दिग्गज ग्रह एक-दूसरे के आमने-सामने (केंद्र भाव में) होते हैं, तो व्यक्ति के भीतर अहंकार और समझ के बीच एक मनोवैज्ञानिक युद्ध छिड़ जाता है।
फैसलों में चूक पड़ सकती है भारी
ज्योतिषियों का मानना है कि इस गोचर के दौरान अति-आत्मविश्वास (Overconfidence) नुकसान का कारण बन सकता है। विशेष रूप से सरकारी कामकाज, अदालती मामलों और बड़े निवेशों में इस समय ‘रुको और देखो’ की नीति अपनाना ही समझदारी होगी। सूर्य की तल्खी और गुरु की गंभीरता के बीच का यह असंतुलन कुछ खास राशियों के लिए मानसिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता का सबब बन सकता है।
इन राशियों पर मंडरा रहे हैं संकट के बादल:
मेष राशि: आपकी ही राशि में सूर्य की मौजूदगी आत्मविश्वास तो देगी, लेकिन गुरु की दृष्टि इसे ‘अहंकार’ में बदल सकती है। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों से बहसबाजी से बचें। किसी भी कानूनी दस्तावेज पर बिना पढ़े हस्ताक्षर करना भारी पड़ सकता है। अपने गुस्से पर काबू रखना इस समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
वृषभ राशि: इस राशि के जातकों के लिए फिजूलखर्ची सिरदर्द बन सकती है। आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाली स्थिति पैदा होगी। यदि आप शेयर बाजार या प्रॉपर्टी में निवेश की सोच रहे हैं, तो फिलहाल रुक जाना ही बेहतर है। आर्थिक मोर्चे पर असुरक्षा का भाव आपको परेशान कर सकता है।
वृश्चिक राशि: आपके लिए यह समय जमीन-जायदाद से जुड़े विवादों को हवा दे सकता है। पैतृक संपत्ति को लेकर परिवार में अनबन होने की आशंका है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और वाहन चलाते समय लापरवाही बिल्कुल न बरतें, क्योंकि दुर्घटना के योग बन रहे हैं।
कुंभ राशि: नौकरीपेशा लोगों के लिए ऑफिस का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है। बॉस का दबाव और काम का बोझ आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है। बचत में सेंध लगने से भविष्य की चिंता सताएगी। भाई-बहनों के साथ रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है, इसलिए बातचीत में शब्दों का चयन सोच-समझकर करें।

