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Sunday Reset Routine: 'संडे रीसेट रूटीन' से बदलें अपना हफ्ता, जानें मन को शांत और प्रोडक्टिव रखने का फॉर्मूला

GGaganpreet Kaur
'संडे रीसेट रूटीन' से बदलें अपना हफ्ता, जानें मन को शांत और प्रोडक्टिव रखने का फॉर्मूला
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Sunday Reset Routine: आज की इस बेतहाशा भागदौड़ भरी जिंदगी में ‘सोमवार’ का नाम सुनते ही कई लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं। बीते हफ्ते के अधूरे छूटे काम, मीटिंग्स का लंबा दौर और जिम्मेदारियों का बोझ मिलकर वीकेंड के आखिरी पलों को भी तनावपूर्ण बना देते हैं। कॉरपोरेट की भाषा में इसे ‘मंडे ब्लूज़’ कहा जाता है। लेकिन मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस मानसिक चक्रव्यूह को एक बेहद आसान तरीके से तोड़ा जा सकता है, जिसे ‘संडे रीसेट रूटीन’ का नाम दिया गया है। रविवार के चौबीस घंटों में से महज कुछ वक्त अगर सही योजना के साथ खुद को दिया जाए, तो आने वाला पूरा हफ्ता न सिर्फ तनावमुक्त बल्कि बेहद ऊर्जावान गुजर सकता है।

आखिर क्यों जरूरी है ‘संडे रीसेट’?

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रविवार को अमूमन लोग केवल देर तक सोने या छुट्टी मनाने का दिन मान लेते हैं, लेकिन असल में यह आने वाले सात दिनों की नींव रखने का सबसे बेहतरीन अवसर होता है। संडे रीसेट का मतलब यह कतई नहीं है कि आप छुट्टी के दिन भी दफ्तर का काम करने बैठ जाएं। यह मूल रूप से आपके दिमाग, शरीर और आपके आस-पास के माहौल को एक नई शुरुआत के लिए ‘रीबूट’ करने की प्रक्रिया है। जब आप मानसिक रूप से पहले से तैयार होते हैं, तो सोमवार की सुबह अचानक आने वाला काम का दबाव आपको परेशान नहीं करता।

डिजिटल दुनिया से दूरी और घर का तालमेल

इस रूटीन की शुरुआत रविवार की सुबह बिस्तर छोड़ने के साथ ही होती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उठते ही फोन की स्क्रीन पर उंगलियां घुमाने की आदत आपके दिमाग को सुबह-सुबह ही थका देती है। संडे की सुबह कम से कम एक घंटा ‘नो-स्क्रीन जोन’ होना चाहिए। इस दौरान हल्की स्ट्रेचिंग, योग या खुली हवा में टहलना आपके न्यूरॉन्स को शांत करता है। इसके बाद, अपने आस-पास के माहौल पर नजर डालें। बिखरा हुआ कमरा या अव्यवस्थित डेस्क छिपे हुए मानसिक तनाव को बढ़ाती है। रविवार को अपनी जरूरी फाइलों, कपड़ों और कमरे को तरतीब से रखना आपके अवचेतन मन को सुकून देता है। साफ-सुथरी जगह सीधे तौर पर कार्यक्षमता (Productivity) को बढ़ावा देती है।

प्लानिंग और ‘मी टाइम’ का सही संतुलन

एक सफल हफ्ते की गुप्त चाबी ‘प्री-प्लानिंग’ में छुपी है। रविवार की शाम को महज १५ मिनट निकालकर आने वाले हफ्ते के सबसे जरूरी कामों की एक रफ लिस्ट (To-Do List) बना लें। किस काम को प्राथमिकता देनी है, यह तय होने से आपका आधा तनाव वहीं खत्म हो जाता है। इसके बाद नंबर आता है ‘मी टाइम’ का। पूरे हफ्ते दूसरों के लिए भागने के बाद, रविवार का कुछ हिस्सा सिर्फ आपकी अपनी पसंद के नाम होना चाहिए। चाहे वो कोई अच्छी किताब पढ़ना हो, संगीत सुनना हो, खाना पकाना हो या फिर अपनों के साथ ठहाके लगाना। यही वो पल होते हैं जो आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। याद रखिए, एक बेहतरीन और कामयाब हफ्ते की शुरुआत हमेशा एक सलीके से जिए गए रविवार से ही होती है।

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