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एआई के लोकतंत्रीकरण संबंधी भारत के प्रयासों का समर्थन करते हैं: स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति

JJagmarg Desk
एआई के लोकतंत्रीकरण संबंधी भारत के प्रयासों का समर्थन करते हैं: स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति
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नयी दिल्ली: स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति जी. पार्मेलिन ने बुधवार को कहा कि उनका देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लोकतंत्रीकरण संबंधी भारत के प्रयासों का पूरी तरह से समर्थन करता है। उन्होंने इसी के साथ एआई इम्पैक्ट समिट में इस प्रौद्योगिकी की क्षमता से वैश्विक स्तर पर सभी को लाभ मिलने के विचार और इसे केंद्र में रखने का स्वागत किया।

पार्मेलिन ने ‘पीटीआई-भाषा’को दिए साक्षात्कार में सीमा पार डेटा के आदान-प्रदान का समर्थन करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी डिजिटल प्रौद्योगिकियों से संभावित लाभों का दोहन करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने साथ ही राष्ट्रों की डेटा संप्रभुता की रक्षा के लिए सिद्धांत और नियम बनाने की भी वकालत की। उम्मीद की जा रही है कि एआई इम्पैक्ट समिट की अगली मेजबानी स्विट्जरलैंड करेगा।

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पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य का स्वागत करता है, जिसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया में हर कोई एआई की क्षमता से लाभान्वित हो सके और कोई भी पीछे न छूटे।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारत में आयोजित शिखर सम्मेलन द्वारा स्थापित सिद्धांत उपयोगी मार्गदर्शन करते हैं। नयी दिल्ली में स्थापित स्वैच्छिक सहयोग की संरचनाएं ऐसा आधार प्रदान करती हैं जो हमें इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद कर सकती हैं। पार्मेलिन उन लगभग 20 वैश्विक नेताओं में शामिल हैं जो नयी दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा ले रहे हैं।

उन्होंने विकासशील देशों पर एआई के संभावित प्रभाव, विशेष रूप से ‘एआई-संचालित डंपिंग’ से उनके श्रम बाजारों की रक्षा करने की चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की।

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि एआई उच्च वेतन वाले देशों में उत्पादन लागत को काफी हद तक कम कर देता है। इससे निर्यात इतना सस्ता हो सकता है कि यह विकासशील देशों में श्रम बाजारों पर दबाव डाले, यहां तक ​​कि पारंपरिक डंपिंग (भारी मात्रा में माल को बाजार में भर देने के संदर्भ में) के बिना भी।

उन्होंने कहा कि व्यापार नीति के माध्यम से ऐसे झटकों को कम किया जा सकता है। हानिकारक, स्थायी संरक्षण उपायों को लागू करने से बचने के लिए स्पष्ट जांच प्रक्रियाएं और स्वत: समझौते नियमों आदि को रद्द करने संबंधी प्रावधान महत्वपूर्ण हैं।

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति ने ‘डेटा संप्रभुता’ कानूनों बनाम ‘डेटा के मुक्त प्रवाह’ की अवधारणा पर चल रही बहस में ऐसे नियमों की वकालत की जो वैश्विक एआई परिदृश्य में सभी हितधारकों के लिए निष्पक्ष परिस्थितियां उत्पन्न कर सकें।

उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड को पूरा विश्वास है कि अगर हम एआई जैसी डिजिटल तकनीकों की क्षमता का लाभ उठाना चाहते हैं तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और डेटा का सीमा पार प्रवाह महत्वपूर्ण है।

पार्मेलिन ने कहा कि इसके सफल होने के लिए, हमें सिद्धांतों और नियमों के एक ऐसे समूह की आवश्यकता है जो हमें एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने में मदद करे और सभी की भागीदारी के लिए आवश्यक विश्वास और निष्पक्ष परिस्थितियां उत्पन्न करे।

उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड एआई के लिए एक भरोसेमंद ढांचा बनाने के लिए रचनात्मक रूप से काम करने को तैयार है। पार्मेलिन ने भारत-स्विट्जरलैंड के व्यापक संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध ‘‘उत्कृष्ट’’ हैं।

उन्होंने कहा विभिन्न क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं, और मेरी यह यात्रा इन अवसरों का पता लगाने के उद्देश्य से भी की जा रही है। हमारे आर्थिक संबंध पूरक औद्योगिक शक्तियों पर आधारित हैं, जो स्विट्जरलैंड और भारत को बहुत प्रभावी ढंग से सहयोग करने में सक्षम बनाते हैं।

पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड मुख्य रूप से मशीनरी, फार्मास्युटिकल और रासायनिक उत्पाद, विशेषीकृत उपकरण, चिकित्सा प्रौद्योगिकी और घड़ियां निर्यात करता है, जबकि भारत से रसायन, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक सामान आयात करता है।

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