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सुप्रीम कोर्ट का स्ट्रीट वेंडर्स के हक में बड़ा फैसला: बिना व्यवस्था हटाना अन्याय, जानिए प्रशासन से क्या बोला कोर्ट

VVinita Kohli
सुप्रीम कोर्ट का स्ट्रीट वेंडर्स के हक में बड़ा फैसला: बिना व्यवस्था हटाना अन्याय, जानिए प्रशासन से क्या बोला कोर्ट
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चंडीगढ़: सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ में रेहड़ी-पटरी वालों को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि उन्हें अचानक या मनमाने तरीके से नहीं हटाया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये लोग केवल सड़क किनारे दुकान लगाने वाले नहीं हैं, बल्कि अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले आम नागरिक हैं। इसलिए उनकी आजीविका का सम्मान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह टिप्पणी मलकित सिंह बनाम चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश मामले की सुनवाई के दौरान की गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को होगी, जिसमें प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

संविधान के तहत काम करने का अधिकार

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जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कहा कि स्ट्रीट वेंडिंग भी संविधान के तहत मिलने वाले काम करने के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने माना कि हर व्यक्ति को व्यापार और रोजगार करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह असीमित नहीं है और इसके साथ नियमों का पालन जरूरी है।

सार्वजनिक व्यवस्था भी जरूरी

अदालत ने कहा कि अगर बिना किसी नियम के सड़क, फुटपाथ या सार्वजनिक स्थानों पर दुकानें लगेंगी तो इससे आम जनता को परेशानी हो सकती है। इससे पैदल चलने वालों को दिक्कत और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए प्रशासन का दायित्व है कि वह संतुलन बनाए रखे और दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखे।

रेहड़ी-पटरी हटाने पर हुआ विवाद

यह मामला चंडीगढ़ में सार्वजनिक स्थानों से रेहड़ी-पटरी हटाने को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है। इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान प्रशासन ने बताया कि अवैध वेंडर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई और 1 अगस्त से 30 नवंबर 2025 के बीच 1024 चालान काटे गए।

सिर्फ हटाना समाधान नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वेंडर्स को हटाना ही समस्या का समाधान नहीं है। अगर किसी वेंडर को हटाया जाता है, तो उसे वैकल्पिक स्थान देना जरूरी है। अदालत ने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह वेंडर्स को निर्धारित वेंडिंग जोन में बसाए और जनता को इसकी जानकारी भी दे।

बिना व्यवस्था हटाना अन्याय

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बिना उचित व्यवस्था के वेंडर्स को हटाना उनके साथ अन्याय होगा। इसलिए प्रशासन को सख्ती के बजाय समझदारी और संतुलन के साथ काम करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वेंडर्स के अधिकारों की रक्षा करना कानून और संविधान दोनों के अनुरूप है।

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