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संघीय ढांचे को बदलने की साजिश था विधेयक, विपक्षी एकजुटता की जीत हुई: प्रियंका गांधी

VVinita Kohli
संघीय ढांचे को बदलने की साजिश था विधेयक, विपक्षी एकजुटता की जीत हुई: प्रियंका गांधी
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नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने शनिवार को कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक देश के संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था और लोकसभा में इसका गिरना लोकतंत्र, संविधान एवं विपक्षी एकजुटता की जीत है। प्रियंका ने कहा कि सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीट के आधार पर तत्काल लागू कर सकती है और यदि वह ऐसा करती है तो विपक्ष इसका समर्थन करेगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कल लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत हुई है। 

मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश की थी, जिसे हमने हरा दिया। ये संविधान की जीत है, देश की जीत है, विपक्षी एकता की जीत है।’’ प्रियंका ने कहा कि यह विपक्षी एकजुटता के लिए ‘निर्णायक क्षण’ हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘गृह मंत्री (अमित शाह) और प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने अपने भाषणों में कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होगा तो न कभी चुनाव जीत पाएगा, न ही सत्ता में आ पाएगा। इन बातों से ही साफ हो गया कि सरकार की मंशा क्या थी।’’ 

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प्रियंका ने दावा किया, ‘‘मेरा मानना है कि सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना है। इसके लिए सरकार ने महिलाओं का इस्तेमाल किया।’’ उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष यह विधेयक पारित करवा दे ताकि उन्हें मनमाने तरीके से परिसीमन की आजादी मिल जाए जिससे मोदी सरकार को जातिगत जनगणना का सहारा न लेना पड़े। उन्होंने दावा किया, ‘‘यह महिला आरक्षण विधेयक की बात नहीं थी। यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी। मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी मिलती। ऐसे में मुमकिन ही नहीं था कि विपक्ष मोदी सरकार का साथ दे।’’

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो कैसे मोदी सरकार को हराया जाता है। प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘मोदी सरकार को पहली बार धक्का लगा है, इसलिए इसे ‘काला दिन’ कह रही है। ये धक्का लगना बहुत जरूरी था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का मानना था कि अगर विधेयक पारित होगा तो उनकी जीत होगी और विधेयक पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता देंगे। वे (भाजपा) ऐसा कर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी।’’ प्रियंका ने हाथरस, उन्नाव और महिला पहलवानों के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा का एक इतिहास है और सदन में इसके विपरीत कुछ कहने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ‘महिलाओं का मसीहा’ बनना चाहती है।

कांग्रेस और विपक्ष के खिलाफ भाजपा के अभियान शुरू करने के बारे में पूछे जाने पर प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘आज महिलाओं का संघर्ष बहुत बढ़ चुका है। वे सरकार का ‘पीआर’ और मीडियाबाजी देख रही हैं, समझ रही हैं। इसलिए अब यह सब नहीं चलेगा।’’ उन्होंने दावा किया कि जनता का भरोसा इस सरकार से उठ चुका है। प्रियंका ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘हम सभी कह रहे हैं कि जिस तरह से महिला आरक्षण में अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षण होगा, उसी तरह संख्या के अनुरूप ओबीसी आरक्षण भी होना चाहिए।’’ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था।

सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े। लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन इन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

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