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रक्षा मंत्री से प्रशासक की मुलाकात के बाद चंडीगढ़ में सैनिक स्कूल की स्थापना को मिली रफ्तार

VVinita Kohli
रक्षा मंत्री से प्रशासक की मुलाकात के बाद चंडीगढ़ में सैनिक स्कूल की स्थापना को मिली रफ्तार
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चंडीगढ़: पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से नई दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद चंडीगढ़ में सैनिक स्कूल की स्थापना के प्रयासों को नई रफ्तार मिली है। नई दिल्ली में हुई इस बैठक के दौरान प्रस्ताव पर सकारात्मक चर्चा हुई, जिससे शहर में इस प्रतिष्ठित संस्थान के खुलने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।  रक्षा मंत्री ने इस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया कि प्रस्ताव पर आगे बढ़ने में सहयोग किया जाएगा। अब शहर को अंतिम औपचारिक स्वीकृति का इंतजार है। 

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रक्षा मंत्री के साथ बैठक में प्रशासक ने कहा कि यदि चंडीगढ़ में सैनिक स्कूल शुरू होता है तो इससे युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र सेवा की भावना को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ट्राइसिटी और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा के साथ सैन्य प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा, जिससे वे भविष्य में सशस्त्र बलों और अन्य राष्ट्रीय सेवाओं में बेहतर योगदान दे सकेंगे। मुलाकात के दौरान सीमा क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी पर भी गंभीर चर्चा हुई। इस चुनौती से निपटने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम को और मजबूत तथा आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया। प्रशासक ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार द्वारा मिल रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

जीएमएसएसएस-23 में स्थापित होना है सैनिक स्कूल

चंडीगढ़ में सैनिक स्कूल खोलने की प्रक्रिया पिछले वर्ष से चल रही है। जून 2025 में इसकी व्यवहार्यता परखने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने सैनिक स्कूल सोसाइटी की गाइडलाइंस का अध्ययन करने के साथ-साथ पीपीपी मॉडल पर चल रहे अन्य स्कूलों का दौरा भी किया। इसके बाद सेक्टर-23 स्थित सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल (जीएमएसएसएस-23) के 16 एकड़ परिसर को संभावित स्थल के रूप में चिन्हित किया गया। 

जुलाई 2025 में स्कूल प्रशासन ने ऑनलाइन आवेदन के साथ पंजीकरण शुल्क जमा किया और अगले ही दिन औपचारिक दस्तावेज भी भेज दिए गए। नवंबर 2025 में मूल्यांकन समिति ने जीएमएसएसएस-23ए का दौरा कर वहां की आधारभूत संरचना, शैक्षणिक तैयारियों, मेस, किचन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। संबंधित अधिकारियों के अनुसार सभी दस्तावेज पूरे पाए गए और प्रस्ताव उपयुक्त माना गया। अब मामला रक्षा मंत्रालय के अधीन सैनिक स्कूल सोसाइटी के पास अंतिम स्वीकृति के लिए लंबित है। रक्षा मंत्री की ओर से मिले आश्वासन के बाद शहर में उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

छठी व नौवीं से प्रवेश, परीक्षा के जरिए होगा चयन

स्वीकृति मिलने के बाद स्कूल में कक्षा छठी और नौवीं में प्रवेश होगा। दाखिला अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होगा, जिसे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी आयोजित करती है। स्कूल पूरी तरह आवासीय होगा और सीबीएसई पाठ्यक्रम के साथ सैन्य प्रशिक्षण, मूल्य आधारित शिक्षा और नेतृत्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार प्रत्येक कक्षा में लगभग 40 से 80 विद्यार्थियों को प्रवेश मिल सकता है। स्टाफिंग पैटर्न में प्राचार्य के नेतृत्व में शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मियों की नियुक्ति होगी। वित्तीय व्यवस्था फीस संरचना के माध्यम से स्वयं संचालित मॉडल पर आधारित रहेगी।

शहर के लिए सैनिक स्कूल है अहम

यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो चंडीगढ़ उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां सैनिक स्कूल की स्थापना होगी। इससे न केवल स्थानीय विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा बल्कि आसपास के राज्यों के अभिभावकों के लिए भी यह एक बड़ा विकल्प बनेगा। लंबे समय से शहर में ऐसे संस्थान की मांग उठती रही है जो पढ़ाई के साथ अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना को प्राथमिकता दे। रक्षा मंत्री से हुई ताजा मुलाकात ने इस दिशा में नई उम्मीद जगाई है। प्रशासनिक हलकों का मानना है कि प्रक्रिया अंतिम चरण में है और औपचारिक मंजूरी मिलते ही आगे की तैयारियां तेज कर दी जाएंगी।

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