Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

चंडीगढ़ का पानी अब निजी हाथों में देने का रास्ता खुला, 24 घंटे जलापूर्ति पर कर्ज मॉडल ठंडे बस्ते में, पाइपलाइनें फेजवाइज बदलने पर सहमति

VVinita Kohli
चंडीगढ़ का पानी अब निजी हाथों में देने का रास्ता खुला, 24 घंटे जलापूर्ति पर कर्ज मॉडल ठंडे बस्ते में, पाइपलाइनें फेजवाइज बदलने पर सहमति
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

चंडीगढ़: शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत देते हुए नगर निगम सदन ने 24 घंटे पेन सिटी जलापूर्ति प्रोजेक्ट पर निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है, जबकि कर्ज आधारित मॉडल को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। वर्ष 2025 की अंतिम जनरल हाउस बैठक में लंबी बहस के बाद यह सहमति बनी कि पूरे शहर में कर्ज लेकर पाइपलाइनें बदलने के बजाय जहां जरूरत हो वहां नगर निगम अपने संसाधनों से चरणबद्ध सुधार करेगा। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के कड़े रुख और चुनावी वर्ष की सियासी संवेदनशीलता के चलते यह फैसला लिया गया, ताकि न तो परियोजना को पूरी तरह नकारा जाए और न ही जनता पर तत्काल आर्थिक बोझ डाला जाए। हालांकि औपचारिक मंजूरी नहीं दी गई, लेकिन निजीकरण अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि फैसले की दिशा बन चुका है।

विज्ञापन

निजी निवेश की ओर झुकाव

सदन में हुई चर्चा के दौरान साफ हुआ कि पूरे शहर में कर्ज लेकर पाइपलाइन बदलने का विकल्प न तो प्रशासक को स्वीकार है और न ही अधिकांश पार्षदों को। ऐसे में निजी निवेश से जल व्यवस्था को आधुनिक बनाने का रास्ता एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में उभरा है। यदि यह मॉडल लागू होता है तो निजी कंपनी खुद पूंजी निवेश करेगी, 24 घंटे पानी सप्लाई और पूरे नेटवर्क का रखरखाव संभालेगी, जबकि नगर निगम नियम और पानी के रेट तय करेगा। हालांकि कई पार्षदों ने आशंका जताई कि निजी हाथों में जाने से पानी महंगा हो सकता है और आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

‘ईएमआई वाला पानी नहीं चलेगा’

कर्ज आधारित मॉडल का कड़ा विरोध करते हुए भाजपा पार्षद सौरभ जोशी ने कहा कि उन्होंने कहा कि पानी मुनाफे का नहीं, बल्कि जनता की मूल जरूरत का विषय है। कर्ज आधारित योजनाओं से आने वाले वर्षों में पानी के रेट में हर साल करीब पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है, जो स्वीकार्य नहीं। 

लीकेज और चोरी रोकने के लिए अलग एजेंसी का सुझाव

बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि नगर निगम केवल पानी की चोरी, लीकेज और प्रेशर मैनेजमेंट के लिए अलग एजेंसी नियुक्त करे। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी, खर्च घटेगा और नियंत्रण नगर निगम के पास रहेगा। इसके साथ ही हाइब्रिड मॉडल पर भी सहमति के संकेत मिले, जिसमें जल सप्लाई का नियंत्रण निगम के पास रहेगा और तकनीकी काम निजी कंपनियों से करवाए जाएंगे।

मनीमाजरा जमीन सौदे पर प्रशासक का सख्त फैसला

सदन बैठक में पार्षद प्रेमलता द्वारा उठाए गए मनीमाजरा की जमीन को औने-पौने दाम पर बेचने के मुद्दे पर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने संज्ञान लेते हुए जमीन कम दर पर न बेचने के निर्देश दिए। इससे नगर निगम को सैकड़ों करोड़ रुपये के संभावित नुकसान से बचाया जा सका। इस फैसले पर पार्षद प्रेमलता ने प्रशासक का आभार जताया। प्रेमलता ने बताया कि उन्होंने डड्डूमाजरा वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और राम दरबार हॉर्टिकल्चर वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट से जुड़े मुद्दे भी उठाए थे, जिनसे नगर निगम और जनता के टैक्स के सैकड़ों करोड़ रुपये की बचत हुई है। अब डड्डूमाजरा वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट का टेंडर पूरी पारदर्शिता के साथ जारी किया जाएगा, जिससे और बचत होने की उम्मीद है। उन्होंने प्रशासक के साथ-साथ नगर निगम कमिश्नर का भी धन्यवाद किया।

सदन में दिखा तालमेल का अभाव

बैठक के दौरान कई मौकों पर मेयर और पार्षदों के बीच तालमेल की कमी भी साफ नजर आई। एक प्रस्ताव पारित होने के बाद अगले प्रस्ताव पर फिर से पुराने मुद्दों पर सवाल उठते रहे। स्लॉटर हाउस से जुड़ा प्रस्ताव भाजपा के कुछ पार्षदों के डिसेंट नोट के साथ दोबारा पारित किया गया। कम्युनिटी सेंटर बुकिंग से जुड़े टेबल प्रस्ताव में भी यही स्थिति बनी। कई बार मेयर भी असहज नजर आईं। हालात यह रहे कि पिछली बैठक के मिनट्स की पुष्टि और चर्चा के बीच दक्षिण सेक्टरों की सफाई व्यवस्था से जुड़ा टेंडर प्रस्ताव अंत में लाना पड़ा।

ये अहम प्रस्ताव भी पारित

  • शहर में कमर्शियल इकाइयों से कचरा उठाने के लिए नया एमओयू
  • रोज फेस्टिवल-2026 के लिए 105.20 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव
  • स्मार्ट सिटी ऑफिस की खाली इमारतों को किराए पर देने का प्रस्ताव
  • मौलीजागरां में सात नर्सरी साइटों की ई-नीलामी
  • डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाले वाहनों के रख-रखाव का प्रस्ताव
  • दक्षिण सेक्टरों में जीआईएस आधारित मैकेनाइज्ड व मैनुअल स्वीपिंग का टेंडर
  • गांव कजहेड़ी में पब्लिक पार्किंग लॉट्स के निर्माण का प्रस्ताव पास हो गया है।
विज्ञापन

चंडीगढ़ की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।