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सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के ज्यूडिशियल करप्शन चैप्टर की सभी कॉपियां हटाने का आदेश, 32 किताबें बाजार से वापस ली गईं

VVinita Kohli
सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के ज्यूडिशियल करप्शन चैप्टर की सभी कॉपियां हटाने का आदेश, 32 किताबें बाजार से वापस ली गईं
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सोशल साइंस पुस्तक में शामिल ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ चैप्टर पर सुनवाई करते हुए पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। अदालत ने किताब की छपाई और बिक्री पर तत्काल रोक लगाई तथा सभी प्रिंट और डिजिटल प्रतियां बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

अदालत की सख्त टिप्पणी

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर सिलेबस से जुड़ी बैठकों का रिकॉर्ड और पुस्तक तैयार करने वाले लेखकों के नाम तलब किए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गहराई से जांच होगी और इसे बंद नहीं किया जाएगा।

बिना शर्त माफी और चेतावनी

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुओ मोटू मामले में बिना शर्त माफी पेश की। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मीडिया के नोटिस में माफी का उल्लेख नहीं था और न्यायपालिका आज आहत है। अदालत ने एनसीईआरटी को आपराधिक अवमानना की चेतावनी देते हुए कहा कि जिम्मेदार व्यक्ति बिना दंड के नहीं बचेंगे।

चैप्टर की सामग्री पर आपत्ति

विवादित अध्याय ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ के भीतर ‘करप्शन इन द ज्यूडीशियरी’ शीर्षक से शामिल किया गया था। अदालत ने कहा कि इसमें न्यायपालिका को मौलिक अधिकारों की रक्षा करने वाली संस्था के रूप में संतुलित ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। न्याय में देरी, लंबित मामलों और शिकायतों का उल्लेख एकतरफा तरीके से किया गया है, जिससे संस्थान की छवि प्रभावित हो सकती है।

24 फरवरी की रिपोर्ट और जांच

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि 24 फरवरी 2026 को एक समाचार लेख प्रकाशित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के सचिव जनरल से पूछा गया कि क्या एनसीईआरटी को ऐसी सामग्री जारी करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि सामग्री की समुचित जांच के बजाय संबंधित अधिकारी ने लापरवाह जवाब देकर पुस्तक का बचाव किया। कोर्ट ने गहन जांच के आदेश दिए हैं।

25 फरवरी को स्वत: संज्ञान

25 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश ने चैप्टर पर कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने तत्काल सुनवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद एनसीईआरटी ने वेबसाइट से पुस्तक हटा ली थी और विवादित चैप्टर हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

सरकार की प्रतिक्रिया

सरकारी सूत्रों ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार का मुद्दा शामिल करना था तो शासन के तीनों अंग—कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका—को संतुलित रूप से शामिल किया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका से जुड़े आंकड़े संसदीय अभिलेखों और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड में उपलब्ध हैं, लेकिन तथ्यों के सत्यापन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया।

यह पुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ शीर्षक से 23 फरवरी को जारी की गई थी और इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जाना था। इसमें लंबित मामलों के आंकड़े—सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट में 62 लाख 40 हजार और अधीनस्थ अदालतों में 4 करोड़ 70 लाख—का उल्लेख किया गया है। एनसीईआरटी ने नई किताबें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा और नई शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार की हैं।

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