Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Thought of the Day: स्कूल की किताबों से नहीं, समय की पाठशाला से मिलते हैं असली जीवन के सबक

GGaganpreet Kaur
स्कूल की किताबों से नहीं, समय की पाठशाला से मिलते हैं असली जीवन के सबक
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

आज की इस आपाधापी और मानसिक तनाव से भरी जिंदगी में एक अदद सकारात्मक विचार किसी संजीवनी की तरह काम करता है। जब भी इंसान मुश्किल दौर से गुजर रहा होता है और चारों तरफ निराशा का अंधेरा छा जाता है, तब एक सही विचार मशाल बनकर आगे बढ़ने का रास्ता दिखाता है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि सुविचार केवल सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड करने या पढ़ने की चीज नहीं हैं, बल्कि इन्हें जीवन के व्यवहार में उतारना जरूरी है। सही समय पर अपनाया गया एक थॉट इंसान के सोचने और नजरिए को पूरी तरह बदलने की ताकत रखता है। इसी कड़ी में आज का सुविचार सीधे तौर पर हमारी जिंदगी की हकीकत से जुड़ा है:

‘समय सबसे बड़ा शिक्षक है। हर अनुभव कुछ सिखाता है। बड़ा सोचो, बड़ा करो।’

विज्ञापन

इतिहास गवाह है, बीता वक्त लौटकर नहीं आता, पर हर पल एक सबक जरूर छोड़ जाता है

इस कायनात में समय को सबसे कीमती और बलवान माना गया है। दौलत खो जाए तो दोबारा कमाई जा सकती है, लेकिन हाथ से छूटा हुआ वक्त कभी लौटकर वापस नहीं आता। गौर करने वाली बात यह है कि समय का पहिया हमेशा घूमता रहता है; अगर आज संकट के बादल हैं, तो कल सुनहरी धूप का निकलना भी तय है। जो व्यक्ति वक्त की नब्ज को पहचानता है और हर अच्छे-बुरे दौर को एक अनुभव मानकर उससे सीख लेता है, कामयाबी उसके कदम चूमती है। असल में, असली जिंदगी के सबक किसी आलीशान स्कूल या मोटी किताबों में नहीं, बल्कि समय की पाठशाला में ही सीखने को मिलते हैं।

सिर्फ सपने देखना काफी नहीं, हौसले के साथ मैदान में डटना भी है जरूरी

अक्सर लोग किसी भी नए काम को शुरू करने से पहले ही हार मान लेते हैं या उसे मुश्किल समझकर कदम पीछे खींच लेते हैं। लेकिन सच यह है कि आपकी जीत इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी सोच कितनी बड़ी है। बड़ी सोच ही इंसान के भीतर मेहनत करने का जुनून पैदा करती है। हालांकि, अनुभवी लोग हमेशा यह हिदायत देते हैं कि सिर्फ बड़े सपने देख लेने भर से मंजिल नहीं मिल जाती। उस ऊंचे लक्ष्य को पाने के लिए अनुशासन, अटूट धैर्य और बिना रुके लगातार प्रयास करने का हौसला होना भी उतना ही जरूरी है।

गलतियों को कमजोरी नहीं, कामयाबी की सीढ़ी बनाएं

जिंदगी में गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन समझदारी इसी में है कि उन गलतियों को खुद पर हावी न होने दिया जाए। हर असफलता अपने पीछे एक सीख छोड़कर जाती है। अगर हमारा नजरिया सकारात्मक है, तो हम अपनी पुरानी कमियों को सुधारकर नए सिरे से बड़ी छलांग लगा सकते हैं। अंततः, बात घूम-फिरकर इसी बिंदु पर आती है कि समय से बड़ा कोई मार्गदर्शक नहीं है। जरूरत बस इस बात की है कि हम हर परिस्थिति का सामना खुले दिमाग से करें, अपने अनुभवों को अपनी ताकत बनाएं और अपना पूरा ध्यान हमेशा अपने बड़े लक्ष्यों पर केंद्रित रखें।

विज्ञापन

जीवन शैली की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।