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Today Suvichar: रातों-रात नहीं मिलता मुकाम, हर छोटा कदम ले जाता है मंजिल के पास

GGaganpreet Kaur
रातों-रात नहीं मिलता मुकाम, हर छोटा कदम ले जाता है मंजिल के पास
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जिंदगी की सड़क हमेशा एक जैसी सपाट नहीं होती है। इस लंबे सफर में उतार-चढ़ाव, धूप-छांव और अनपेक्षित मोड़ आना तय है, जिनसे कोई भी इंसान बच नहीं सकता है। कई बार हालात इस कदर हावी हो जाते हैं कि व्यक्ति के कदम ठिठक जाते हैं और आगे बढ़ने का रास्ता पूरी तरह धुंधला नजर आने लगता है। लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि टूटते हौसलों के बीच उपजा एक छोटा सा सकारात्मक विचार भी भीतर वो चिंगारी सुलगा देता है, जो घने अंधेरे को चीरने के लिए काफी होती है। संकट का यही वो दौर होता है जब हमारी जीवटता और संघर्ष क्षमता की असली आजमाइश होती है।

महान विचारकों का हमेशा से मानना रहा है कि अच्छे सुविचार महज दीवारों पर टांगने या सुबह की शुभकामनाओं तक सीमित रखने के लिए नहीं होते हैं। इन विचारों को जिंदगी के फलसफे और अपने दैनिक व्यवहार में उतारना बेहद जरूरी है। सही वक्त पर जेहन में बैठी एक सही बात हमारे सोचने और काम करने के ढर्रे को पूरी तरह से बदल देती है। इसी वैचारिक निरंतरता को बनाए रखने के लिए आज हम उस कालजयी पंक्ति की गहराई को टटोल रहे हैं, जिसने न जाने कितनी डूबती उम्मीदों को हमेशा तिनके का सहारा दिया है।

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‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’

यह साधारण सी दिखने वाली पंक्ति अपने आप में जीवन जीने का एक मुकम्मल दस्तावेज है। यह हमें साफ तौर पर सचेत करती है कि अगर किनारे पर खड़े होकर सिर्फ समंदर की लहरों की भयावहता को नापते रहेंगे, तो कभी पार नहीं जा सकेंगे। ठीक इसी तरह जिंदगी के थपेड़ों से सहमकर हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाने से कभी किसी की नियति नहीं बदलती है। इस पूरी दुनिया में आज तक ऐसा कोई भी शख्स नहीं हुआ है, जिसने बिना कड़े संघर्ष के कामयाबी का असली स्वाद चखा हो।

फर्क सिर्फ इतना होता है कि कुछ लोग मुश्किलों के पहले ही वार में घुटने टेक देते हैं, जबकि कुछ लोग हर चोट को ढाल बनाकर आगे बढ़ जाते हैं। कामयाबी का सेहरा हमेशा उन्हीं के सिर बंधता है जो बिखरने के बाद खुद को दोबारा समेटने का माद्दा रखते हैं।

निरंतरता की ताकत: हर छोटा कदम है अहम

अक्सर लोग दूसरों की कामयाबी को एक जादुई घटना मान लेते हैं, जबकि असलियत इसके बिल्कुल उलट होती है। सफलता कोई रातों-रात होने वाला चमत्कार नहीं है, बल्कि यह एक लंबी और थका देने वाली निरंतर प्रक्रिया का नाम है। इसके लिए व्यक्ति को कड़े अनुशासन, अटूट धैर्य और लगातार पसीना बहाने की सख्त जरूरत होती है।

आपकी शुरुआत चाहे कितनी ही मामूली क्यों न हो, रोज उठाया गया एक छोटा सा कदम आपको आपकी मंजिल के बेहद करीब ले जाता है। चाहे सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा कोई छात्र हो, नया स्टार्टअप शुरू करने वाला उद्यमी हो या फिर अपनी जमीन पर पसीना बहाता किसान, रास्ते सिर्फ उसी के लिए खुलते हैं जो रुकना नहीं जानता है।

हौसले के आगे घुटने टेकती हैं परिस्थितियां

जो इंसान अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा रखता है और विपरीत परिस्थितियों में भी मेहनत का दामन नहीं छोड़ता, उसे देर-सवेर ही सही मुकाम जरूर मिलता है। मुश्किलें आपका रास्ता कुछ वक्त के लिए रोक तो सकती हैं, लेकिन अगर इरादे चट्टानी हों तो वक्त की बड़ी से बड़ी लहर भी आपके हौसले की कश्ती को डूबो नहीं सकती है। याद रखिए कि कोशिश करने वालों के शब्दकोश में ‘हार’ जैसी कोई चीज ही नहीं होती है। वहां सिर्फ दो ही शब्द हमेशा सबसे ऊपर होते हैं, पहला जीत और दूसरा सीख।

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