Today Thought: आज का सुविचार: “पहचान से मिला काम थोड़े समय के लिए टिकता है, लेकिन काम से मिली पहचान जीवनभर साथ निभाती है।”
यह बात आज के इस दौर में और भी मौजूं हो जाती है, जहाँ हर कोई कामयाबी की सीढ़ियां बहुत तेजी से लांघना चाहता है। अकसर लोग आगे बढ़ने के लिए किसी बड़े नाम का सहारा ढूंढते हैं, कोई सिफारिश या कोई ऐसा जुगाड़ जो उन्हें रातों-रात मंजिल तक पहुंचा दे। शुरुआती तौर पर यह रास्ता बेहद आसान और चमकदार दिखाई देता है, लेकिन इस चमक की उम्र बहुत लंबी नहीं होती। इतिहास गवाह है कि बैसाखियां आपको सहारा तो दे सकती हैं, रफ्तार नहीं।
जब आप अपने हुनर, अपनी मेहनत और अपने फैसलों के दम पर शून्य से शुरुआत करते हैं, तो वह सफर यकीनन लंबा और थका देने वाला होता है। लेकिन उस संघर्ष की भट्ठी में तपकर जो शख्सियत निखरती है, उसे दुनिया का कोई भी तूफान हिला नहीं सकता। सिफारिश से मिली कुर्सी या ओहदा आपको एक रुतबा तो दे सकता है, लेकिन उस पद के साथ न्याय करने की काबिलियत उधार नहीं मांगी जा सकती। वह तो केवल आपकी अपनी लगन और निष्ठा से ही पैदा होती है।
वक्त की एक खूबी है—यह हर उस चीज को धुंधला कर देता है जो कमजोर बुनियाद पर टिकी हो। वक्त के साथ बड़ी से बड़ी पैरवी और बाहरी मदद भी बेअसर हो जाती है, लेकिन आपका किया हुआ ठोस काम हमेशा चमकता रहता है।
सीधे शब्दों में कहें तो, किसी के पीछे खड़े होकर उसकी परछाई बनने से कहीं बेहतर है कि धूप में तपकर अपनी खुद की जमीन तैयार की जाए। एक ऐसी पहचान, जो आपकी खामोशी में भी आपकी काबिलियत की गवाही दे। आज की शुरुआत इसी इरादे के साथ होनी चाहिए कि रास्ता चाहे जो हो, कदम हमारे अपने होंगे और कोशिश सौ फीसदी।

