दिल्ली। मशहूर अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की रहस्यमयी हालात में हुई मौत के मामले ने अब पूरी तरह तूल पकड़ लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस की कड़ियां जोड़ने में जुटी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसी मृतका की सास व रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह को एक साथ मेज पर बिठाकर जिरह करने वाली है। सूत्रों की मानें तो अब तक की अलग-अलग पूछताछ में मां-बेटे के बयानों में कई तकनीकी और व्यावहारिक खामियां मिली हैं, जिन्हें दूर करने के लिए दोनों का आमना-सामना कराना बेहद जरूरी हो गया है।
जेपी अस्पताल में मेडिकल टेस्ट के बाद आज दोपहर कोर्ट में पेशी
जांच के तय प्रोटोकॉल के तहत सीबीआई बुधवार को सबसे पहले समर्थ सिंह को भोपाल के जेपी अस्पताल लेकर पहुंचेगी। वहां डॉक्टरों की पैनल की देखरेख में आरोपी का विस्तृत मेडिकल मुआयना कराया जाएगा। इसके बाद दोपहर करीब ढाई बजे समर्थ को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाना है। जांच एजेंसी कोर्ट के सामने अब तक मिले सबूतों को रखकर आरोपी की कस्टडी या विस्तृत पूछताछ की विधिवत मंजूरी मांगेगी, ताकि वारदात वाले दिन की कड़ियों को सिलसिलेवार ढंग से जोड़ा जा सके।
पुलिस से हाथ में ली कमान; खंगाले जा रहे हैं मोबाइल, लैपटॉप और सीडीआर
इस मामले को मुकाम तक पहुंचाने के लिए सीबीआई पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों पर भरोसा कर रही है। मंगलवार को ही केंद्रीय एजेंसी ने स्थानीय पुलिस से इस केस से जुड़ी डायरी और समर्थ सिंह के जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अपने कब्जे में ले लिए हैं। साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से समर्थ के मोबाइल, लैपटॉप और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि घटना के ठीक पहले और बाद में समर्थ की किन-किन लोगों से बातचीत हुई थी और क्या कोई डेटा डिलीट तो नहीं किया गया।
रिटायर्ड जज की अग्रिम जमानत पर भी टिकी हैं निगाहें
एक तरफ जहां सीबीआई समर्थ सिंह के गिरेबान तक पहुंच चुकी है, वहीं दूसरी तरफ उसकी मां और पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर भी अदालत में सुनवाई होनी है। कानूनी हलकों में भी इस मामले पर पैनी नजर रखी जा रही है, क्योंकि आरोपी पक्ष खुद न्यायपालिका के बड़े पद से जुड़ा रहा है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि उनके पास मृतका के मानसिक उत्पीड़न और संदिग्ध परिस्थितियों से जुड़े कई ऐसे पुख्ता इनपुट्स हैं, जिनके आधार पर आरोपियों पर शिकंजा और ज्यादा कसना तय है।

