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Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा केस का पूरा सच, आखिरी मैसेज और हाई कोर्ट में पति के सरेंडर की इनसाइड स्टोरी

AAmandeep Singh
ट्विशा शर्मा केस का पूरा सच, आखिरी मैसेज और हाई कोर्ट में पति के सरेंडर की इनसाइड स्टोरी
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साल 2009 से 2012 के बीच मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली और ‘मिस पुणे’ का खिताब जीतने वाली ट्विशा शर्मा एक बेहद होनहार कॉर्पोरेट प्रोफेशनल भी थीं। एमबीए (MBA) करने के बाद वे बड़े पदों पर कार्यरत थीं। साल 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए उनकी मुलाकात भोपाल के रहने वाले और पेशे से वकील समर्थ सिंह से हुई। दिसंबर 2025 में बड़े धूमधाम से करीब 1 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके दोनों की शादी हुई। लेकिन शादी के महज छह महीने के भीतर ही, 12 मई 2026 की रात कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में ट्विशा का शव फंदे से लटका मिला। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा और उनके भाई का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले, जिनमें समर्थ की मां गिरिबाला सिंह (जो खुद एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं) शामिल हैं, लगातार उसे प्रताड़ित कर रहे थे।

‘मैं फंस गई हूं’— आखिरी चैट ने खोली ससुराल की पोल

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ट्विशा की मौत के बाद उसकी सहेली मीनाक्षी के साथ इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर हुई आखिरी बातचीत के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। मौत से कुछ घंटे पहले ट्विशा ने अपनी सहेली को लिखा था, “मैं शादी के एक बहुत बड़े जाल में फंस गई हूं। तुम कभी मत फंसना। अभी मैं बात करने की स्थिति में नहीं हूं, सही वक्त आने पर तुम्हें कॉल करूंगी।” सहेली ने घबराकर जवाब भी दिया था, “टुकटुक, मुझे तुम्हारी बहुत चिंता हो रही है।” लेकिन वह सही वक्त कभी नहीं आया और अगली सुबह ट्विशा की मौत की खबर सामने आई।

कोर्ट रूम का ड्रामा: एम्स की रिपोर्ट बनाम शरीर पर चोट के निशान

इस हाई-प्रोफाइल मामले में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपी गई भोपाल एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले को और उलझा दिया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ट्विशा की मौत दम घुटने (Asphyxia) से हुई है, लेकिन उनके शरीर पर कई जगहों पर ‘ब्लंट फोर्स’ (भारी चीज के प्रहार) से आई चोटों के गहरे निशान मिले हैं। इसी को आधार बनाकर ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या है और रसूखदार सासरिया परिवार अपनी ताकत के बल पर जांच को प्रभावित कर रहा है।

इसी बीच, मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पहुंची। जहां मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह के वकीलों ने कड़ा रुख भांपते हुए अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली और कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने के लिए तैयार है।

सॉलिसिटर जनरल की एंट्री और शव को प्रिजर्व करने की जंग

सुनवाई के दौरान कोर्ट में दूसरे पोस्टमार्टम (सेकंड ऑटॉप्सी) को लेकर तीखी बहस हुई। ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह के वकील ने दलील दी कि शव का अंतिम संस्कार करना उनका फर्ज है और शव को इस तरह मॉर्च्युरी में सड़ने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि दोबारा पोस्टमार्टम की मांग करना एम्स के डॉक्टरों की काबिलियत पर शक करने जैसा है।

इस बीच देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यद्यपि एम्स के डॉक्टरों की निष्पक्षता बेमिसाल है, लेकिन यदि पीड़ित परिवार को लगता है कि कोई अहम सुराग छूट गया है, तो न्याय के हित में दूसरी राय (सेकंड ओपिनियन) ली जा सकती है। इससे पहले भोपाल की जिला अदालत ने दिल्ली एम्स में दोबारा जांच की मांग को क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया था, लेकिन पुलिस को सख्त निर्देश दिए थे कि मृतका के शव को (माइनस 80 डिग्री) के फ्रीजर में पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। अब हाई कोर्ट द्वारा दूसरे पोस्टमार्टम पर सहमति जताए जाने के बाद इस पूरे मामले से पर्दा हटने की उम्मीद बढ़ गई है।

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