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बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग को लेकर अनोखा विरोध 560 दिनों बाद खत्म, 400 फुट ऊंचे टावर नीचे उतरे गुरजीत खालसा

VVinita Kohli
बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग को लेकर अनोखा विरोध 560 दिनों बाद खत्म, 400 फुट ऊंचे टावर नीचे उतरे गुरजीत खालसा
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समाना/ पटियाना: पंजाब के पटियाला जिले में शुक्रवार सुबह एक असाधारण विरोध का अंत हुआ जब 43 वर्षीय कार्यकर्ता गुरजीत सिंह खालसा को 560 दिनों बाद 400 फुट ऊंचे मोबाइल टावर से सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। वह समाना क्षेत्र में 12 अक्टूबर 2024 से टावर पर बैठे थे और गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में सख्त कानून की मांग कर रहे थे। प्रशासन ने सेना की मदद से यह अभियान पूरा किया।

लंबे विरोध का अनोखा तरीका

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गुरजीत सिंह खालसा ने अपना विरोध जताने के लिए असामान्य तरीका अपनाया था। वह पटियाला जिले के समाना इलाके में एक ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गए और वहीं से अपनी मांगों को उठाते रहे। इस दौरान उन्हें रस्सियों के जरिए भोजन और जरूरी सामान पहुंचाया जाता था, जिससे वह इतने लंबे समय तक वहां टिके रह सके।

प्रशासन और सेना की संयुक्त कार्रवाई

पटियाला जिला प्रशासन ने खालसा को सुरक्षित नीचे लाने के लिए पहले से योजना बनाई थी। सेना और दमकल विभाग की टीमों ने बृहस्पतिवार को एक पूर्वाभ्यास भी किया था। शुक्रवार सुबह अभियान चलाकर उन्हें सुरक्षित नीचे उतारा गया, जहां समर्थकों ने उनका स्वागत किया और फूल बरसाए।

नए कानून के बाद बदला फैसला

पंजाब सरकार ने हाल ही में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ अधिसूचित किया। इस कानून में बेअदबी के मामलों में आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसी के लागू होने के बाद खालसा ने अपना विरोध समाप्त करने का निर्णय लिया।

विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी

यह विधेयक 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। इसके बाद राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इसे मंजूरी दी, जिससे यह कानून लागू हो सका। सरकार के इस कदम को खालसा की मांगों के अनुरूप माना गया।

चिकित्सा जांच और आगे की प्रक्रिया

टावर से नीचे उतरने के तुरंत बाद गुरजीत सिंह खालसा को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी चिकित्सा जांच की गई। प्रशासन ने बताया कि उनकी स्थिति स्थिर है और उन्हें आवश्यक देखभाल दी जा रही है। इस घटनाक्रम के साथ पंजाब में एक लंबे और अनोखे विरोध का समापन हो गया।

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