Uttarakhand News: उत्तराखंड की गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी लोकभाषाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में AI स्ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग (AiSE) फाउंडेशन की ‘भाषा AI’ पहल के तहत वॉइस कलेक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया। अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री की कुमाऊंनी भाषा में रिकॉर्ड की गई वॉइस क्लिप से हुई। इस पहल के तहत तीनों लोकभाषाओं के शब्दों, आवाजों और उच्चारण के नमूने जुटाए जाएंगे। इसका उद्देश्य ऐसा डिजिटल संग्रह तैयार करना है, जिसकी मदद से भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक इन भाषाओं को बेहतर ढंग से समझ सके और लोगों से उनकी अपनी बोली में संवाद कर सके।
स्थानीय भाषाओं को AI से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहल की सराहना करते हुए कहा कि बोली-भाषाएं हमारी पहचान हैं। लोककला, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है। उन्होंने कहा कि AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसका दायरा और विस्तृत होगा। ऐसे में उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाओं को भी तकनीक के अनुरूप विकसित करना होगा, ताकि राज्य की भाषाई विरासत को व्यापक पहचान मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोग भी अपनी स्थानीय भाषा के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल कर सकें और अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचा सकें।
इसके लिए AI का स्थानीय भाषाओं को सही ढंग से समझना जरूरी है। केवल शब्दों का संग्रह पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके सही उच्चारण और बोलने के अलग-अलग तरीकों को भी तकनीक से जोड़ना होगा। धामी ने बताया कि उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही शब्द का उच्चारण अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है। पोर्टल पर आवाज और भाषा से जुड़ी जानकारी अपलोड होने से AI को इन विविधताओं को समझने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में स्थानीय लोगों को उनकी अपनी बोली में अधिक सटीक जानकारी उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रीतम भरतवाण बोले- लोकभाषाओं में समाई है सांस्कृतिक विरासत
इस अवसर पर पद्मश्री लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने कहा कि उत्तराखंड की लोकभाषाओं में लोकजीवन, लोकगीत, जागर और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्ध विरासत मौजूद है। उन्होंने कहा कि जागर अकादमी इस पहल में स्थानीय भाषाओं के सही उच्चारण और उनकी मौलिकता बनाए रखने में सहयोग करेगी। AISE फाउंडेशन के संस्थापक सचिदानंद सेमवाल ने बताया कि ‘भाषा AI’ पहल के माध्यम से गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं के शब्दों और आवाजों का संग्रह तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में AI आधारित तकनीक को इन लोकभाषाओं में संवाद करने में सक्षम बनाना है। कार्यक्रम में शक्ति प्रसाद भट्ट, गजेंद्र नौटियाल, अनिरुद्ध रैथवान, निधि सेमवाल, अनिल गोदियाल, डॉ. जे.के. पांडे और देव रतूड़ी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

