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पांच राज्यों में फैले वाहन चोरी गिरोह का भंडाफोड़: 10 गिरफ्तार, 31 गाड़ियां बरामद

VVinita Kohli
पांच राज्यों में फैले वाहन चोरी गिरोह का भंडाफोड़: 10 गिरफ्तार, 31 गाड़ियां बरामद
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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने ऊंचे दामों वाली गाड़ियों की चोरी करने, उनके चेसिस नंबर से छेड़छाड़ करने और जाली दस्तावेजों के जरिए उनका दोबारा पंजीकरण कराने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस सिलसिले में गिरोह के 10 मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है और विभिन्न राज्यों से चोरी की 31 लग्जरी गाड़ियां बरामद की गई हैं, जिनके चेसिस नंबर बदले गए थे। यह मामला अगस्त 2025 में मौर्य एनक्लेव थाने में दर्ज एक ई-प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें पीतमपुरा की एक निवासी ने अपनी एसयूवी चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई, जिसने जांच के दौरान दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में फैले इस बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।

जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि यह गिरोह न केवल वाहन चोरी करता था, बल्कि कर्ज की किस्तें न चुकाने के कारण जब्त की गई गाड़ियां भी हासिल करता था और उनके इंजन व चेसिस नंबर बदलकर उन्हें नयी पहचान देता था। अधिकारियों के अनुसार, गिरोह इन वाहनों के पुन: पंजीकरण के लिए फर्जी बिक्री प्रमाण पत्र (फॉर्म-21), जाली पंजीकरण कागजात और बैंक के फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का उपयोग करता था। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “उन्होंने चोरी की गाड़ियों को वैध बनाने के लिए एक समानांतर व्यवस्था बना रखी थी और इन्हें अनजान खरीदारों को बेच दिया जाता था।”

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साजिश की गहराई से जांच के लिए अपराध शाखा ने इस साल जनवरी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एक अलग मामला दर्ज किया था। पुलिस ने कई राज्यों में छापेमारी कर सरगना दमनदीप सिंह उर्फ लकी (42) सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। दमनदीप जालंधर में पुरानी कारों की खरीद-बिक्री का काम करता था और कथित तौर पर पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, हिमाचल प्रदेश के पंजीकरण प्राधिकरण का एक लिपिक, चेसिस नंबर बदलने में माहिर मैकेनिक और बिचौलिये शामिल हैं।

जांचकर्ताओं ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने ओटीपी में हेरफेर करके प्राप्त अनधिकृत विवरण का उपयोग करते हुए वाहन पोर्टल तक पहुंच प्राप्त की और फर्जी पंजीकरण दस्तावेज तैयार किए। संदेह है कि इस सिंडिकेट ने अब तक 1,000 से अधिक वाहनों का फर्जी पंजीकरण कराया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह पकड़े जाने से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में चोरी, पंजीकरण और बिक्री का काम बेहद विकेंद्रीकृत तरीके से करता था। कुछ सदस्य इन वाहनों का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी जैसी अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए भी करते थे।

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