आजकल के युवाओं पर न जाने कौन सा भूत सवार है कि वे चंद मिनट या कुछ सेकेंड की बचत के लिए अपनी जिंदगी को दांव पर लगाने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। इंटरनेट की दुनिया में इस समय एक ऐसा ही झकझोर देने वाला वीडियो हर तरफ तैर रहा है, जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। वीडियो किसी रेलवे स्टेशन या आउटर का मालूम पड़ता है, जहां एक यात्री ट्रेन ट्रैक पर बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। सामान्य तौर पर समझदारी इसी में है कि इंसान ट्रेन के पूरी तरह स्टेशन से गुजर जाने का इंतजार करे, लेकिन यहां जो कुछ हुआ वह कानून और इंसानियत दोनों को शर्मसार करने वाला है।
ट्रेन अभी ट्रैक से पूरी तरह गुजरी भी नहीं थी कि वहां खड़े कुछ लड़कों और युवतियों ने आव देखा न ताव, सीधे रेंगती हुई ट्रेन के नीचे से घुसकर पटरी पार करना शुरू कर दिया। वे झुककर और जान बचाते हुए बोगियों के नीचे से एक-एक कर दूसरी तरफ निकल रहे थे, मानो कोई खेल चल रहा हो।
लड़कियों ने भी लगाया जान का सट्टा; स्टेशन पर मूकदर्शक बने रहे लोग
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे डरावना और हैरान करने वाला पहलू यह था कि इस जानलेवा करतब में सिर्फ लड़के ही आगे नहीं थे, बल्कि उनके साथ खड़ी कुछ युवतियां भी बराबरी से बोगियों के नीचे रेंगती नजर आईं। वहां प्लेटफॉर्म और आसपास मौजूद अन्य मुसाफिरों ने जब इस खौफनाक मंजर को देखा, तो हर कोई सन्न रह गया। किसी ने उन्हें रोकने की जहमत नहीं उठाई, बल्कि कुछ लोग अपने मोबाइल के कैमरे निकालकर इस पूरी घटना की रील और वीडियो बनाने में मशरूफ हो गए। देखते ही देखते यह क्लिप डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गई और अब इस पर तीखी बहस छिड़ गई है।
कमेंट सेक्शन में लोग इस बात पर गहरी नाराजगी जता रहे हैं कि यह कोई मजबूरी नहीं बल्कि सरासर बेवकूफी और दिवालियापन है। यूजर्स का कहना है कि अगर उसी वक्त लोको पायलट ने ट्रेन की स्पीड थोड़ी भी बढ़ा दी होती या किसी लड़की का दुपट्टा या लड़के का जूता पटरी या बोगी के किसी कल-पुर्जे में फंस जाता, तो लाशों के ढेर लगने में दो सेकेंड का समय भी नहीं लगता। लाचारी इंसान को समझ आती है, लेकिन ऐसी लापरवाही को कोई कैसे जायज ठहरा सकता है?
दुर्घटनाएं किसी को मौका नहीं देतीं; रेलवे नियमों को ठेंगे पर रख रही नई उम्र की खेप
रेलवे प्रशासन हर दिन करोड़ों रुपए खर्च करके विज्ञापनों और अनाउंसमेंट के जरिए लोगों को जागरूक करता है कि ‘पटरी पार करना कानूनी अपराध है और जानलेवा है।’ इसके बावजूद जमीनी हकीकत बदलने का नाम नहीं ले रही। अक्सर लोग यह सोचकर पटरियों पर कूद जाते हैं कि ट्रेन अभी दूर है या बहुत धीमी चल रही है, वे आराम से निकल जाएंगे। लेकिन इतिहास गवाह है कि रेलवे ट्रैक पर होने वाले अधिकतर हादसे इसी ‘ओवर कॉन्फिडेंस’ और गलतफहमी का नतीजा होते हैं।
इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर देश की युवा पीढ़ी की मानसिकता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में दिख रहे चेहरे किसी अनपढ़ या नासमझ बच्चे के नहीं, बल्कि अच्छे घरों के युवाओं के लग रहे हैं। यही वजह है कि लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि जब देश की पढ़ी-लिखी युवा पौध ही सुरक्षा नियमों को ठेंगे पर रखने लगे, तो हादसों को रोकना नामुमकिन हो जाता है। अब देखना यह है कि वीडियो संज्ञान में आने के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) इन हुड़दंगियों की पहचान कर क्या कार्रवाई करता है।

