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Empty Stomach Health Mistakes: सुबह खाली पेट भूलकर भी न पिएं चाय-कॉफी, सेहत को फायदे की जगह हो सकते हैं ये 4 गंभीर नुकसान

GGaganpreet Kaur
सुबह खाली पेट भूलकर भी न पिएं चाय-कॉफी, सेहत को फायदे की जगह हो सकते हैं ये 4 गंभीर नुकसान
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हेल्थ एंड वेलनेस डेस्क: “सुबह का नाश्ता राजा की तरह होना चाहिए…” यह पुरानी कहावत हम सबने सुनी है, लेकिन इस राजा के जागने से ठीक पहले पेट का जो ‘दरबार’ सजता है, उसे लेकर हम गंभीर नहीं हैं। अक्सर अलार्म बजते ही हमारी आंखें चाय की प्याली या कॉफी के मग की तलाश करने लगती हैं। शहरी जीवन में इसे ‘अभिजात्य’ या ‘ताजगी का जरिया’ मान लिया गया है, लेकिन मेडिकल साइंस की नजर में खाली पेट इन चीजों का प्रवेश शरीर के आंतरिक सिस्टम के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। रात भर (लगभग 7 से 8 घंटे) के उपवास के बाद जब हमारा पेट पूरी तरह खाली और संवेदनशील होता है, तब उसे ईंधन देने में की गई एक छोटी सी लापरवाही भी लंबे समय में अल्सर, गैस और थायराइड जैसी बीमारियों की वजह बन सकती है।

1. बेड-टी और कॉफी: ताजगी का छलावा, एसिडिटी की गारंटी

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चाय और कॉफी में पाए जाने वाले कैफीन और निकोटिन जैसे तत्व दिमाग को तुरंत चौकन्ना तो कर देते हैं, लेकिन खाली पेट इनका असर बेहद नुकसानदेह होता है।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स का कहना है:

“खाली पेट चाय या ब्लैक कॉफी पीने से हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) का स्राव तेजी से बढ़ता है। चूंकि पेट में उस वक्त पचाने के लिए कोई ठोस भोजन नहीं होता, इसलिए यह एसिड पेट की नाजुक म्यूकोसा परत को छीलने लगता है। यही वजह है कि सुबह उठते ही चाय पीने वालों को अक्सर सीने में जलन, खट्टी डकारें और जी मिचलाने की शिकायत रहती है।”

2. फ्रूट जूस: सेहत की आड़ में शुगर का हमला

हममें से कई लोग बड़े चाव से सुबह-सुबह मौसमी या संतरे का जूस पीते हैं और सोचते हैं कि वे बहुत हेल्दी लाइफस्टाइल जी रहे हैं। मगर हकीकत इसके उलट है। फलों को सीधे खाने के बजाय जब हम उनका जूस निकालते हैं, तो उनका सबसे जरूरी हिस्सा यानी ‘फाइबर’ कूड़ेदान में चला जाता है। पीछे बच जाता है केवल पानी और बहुत तेज ‘फ्रुक्टोज’ (प्राकृतिक चीनी)। खाली पेट यह मीठा जूस सीधे तौर पर हमारे पैनक्रियाज पर बोझ डालता है, जिससे इंसुलिन का संतुलन बिगड़ता है और शरीर में फैट जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके अलावा, खट्टे फलों का जूस एसिडिटी को दोगुना कर देता है।

3. तला-भुना और मीठा नाश्ता: मेटाबॉलिज्म के दुश्मन

भारतीय घरों में रविवार या छुट्टी के दिन सुबह-सुबह कचौड़ी, समोसे या जलेबी खाने का एक पुराना चलन रहा है। लेकिन खाली पेट बहुत अधिक तेल, घी या रिफाइंड शुगर (मैदा और चीनी) का संयोजन हमारे पाचन तंत्र को सुस्त कर देता है। यह भोजन पचने में बहुत अधिक समय लेता है, जिसके कारण सुबह सक्रिय रहने के बजाय शरीर सुस्ती और आलस से भर जाता है।

तो फिर, कैसी हो दिन की पहली शुरुआत?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह उठने के बाद सबसे पहले शरीर को हाइड्रेट करना चाहिए। इसके लिए एक या दो गिलास सामान्य या हल्का गुनगुना पानी पीना सबसे बेहतरीन है, जो रात भर के टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थों) को साफ करता है।

इसके बाद के स्टेप्स इस तरह होने चाहिए:

सुपरफूड्स से शुरुआत: पानी पीने के 15-20 मिनट बाद 4 से 5 भीगे हुए बादाम, अखरोट या एक चम्मच भीगे हुए चिया सीड्स खाएं। यह पेट के एसिड को संतुलित करते हैं।

साबुत फल: जूस की जगह पूरा सेब, पपीता या केला चबाकर खाएं ताकि शरीर को भरपूर फाइबर मिले।

प्रोटीन और जटिल कार्ब्स: इसके बाद नाश्ते में दलिया, ओट्स, पोहा, इडली या उबले हुए अंडे जैसी चीजें शामिल करें, जो धीरे-धीरे पचती हैं और दोपहर तक शरीर को एक समान ऊर्जा देती रहती हैं।

प्रत्येक व्यक्ति का शरीर, उसकी तासीर और पाचन क्षमता अलग होती है। यदि आप पहले से ही पेट की किसी गंभीर बीमारी या डायबिटीज से जूझ रहे हैं, तो किसी न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के बिना अपनी डाइट में बड़ा बदलाव न करें। याद रखिए, सुबह की सही शुरुआत केवल एक दिन की बात नहीं, बल्कि बुढ़ापे तक निरोगी रहने की दीर्घकालिक निवेश योजना है।

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