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Why Elephants Dont Get Cancer: हाथियों को क्यों नहीं होता कभी कैंसर? वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला शरीर में छिपा वो चमत्कारी जीन

GGaganpreet Kaur
हाथियों को क्यों नहीं होता कभी कैंसर? वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला शरीर में छिपा वो चमत्कारी जीन
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आज के दौर में कैंसर इंसानों के लिए सबसे जानलेवा बीमारियों में से एक बन चुका है। खराब जीवनशैली और पर्यावरण के चलते अब कम उम्र के युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। लेकिन इस बीच हमारी ही धरती पर एक ऐसा जीव भी मौजूद है, जिसे प्रकृति ने कैंसर से लड़ने का एक अभेद्य कवच दे रखा है। हम बात कर रहे हैं जंगलों के राजा और सबसे भारी-भरकम जीव हाथी की। बरसों की रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने यह साबित किया है कि हाथियों को कैंसर जैसी घातक बीमारी न के बराबर होती है। हैरानी की बात यह है कि इंसानों की तुलना में हाथियों का शरीर सैकड़ों गुना बड़ा होता है और उनकी कोशिकाएं (Cells) भी बहुत ज्यादा होती हैं, फिर भी वे इस बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

‘गार्जियन ऑफ जीनोम’: क्या है TP53 जीन का असली विज्ञान?

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इस रहस्य को सुलझाने के लिए लंबे समय तक दुनिया भर के आनुवंशिकीविद् (Geneticists) और डॉक्टर जुटे रहे। आखिरकार, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इसके पीछे छिपे असल जेनेटिक कोड को डिकोड कर लिया है। दरअसल, इंसानों और हाथियों दोनों के शरीर में ‘TP53’ नाम का एक ट्यूमर सप्रेसर जीन होता है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘गार्जियन ऑफ जीनोम’ यानी जीनोम का रक्षक कहा जाता है। इस जीन का मुख्य काम शरीर में खराब या डैमेज हो चुकी कोशिकाओं को ठीक करना या उन्हें नष्ट करना होता है ताकि वे कैंसर का रूप न ले सकें। इंसानों में इस सुरक्षात्मक जीन की केवल दो कॉपियां (माता और पिता से एक-एक) होती हैं, जिसके कारण हमारा शरीर कई बार कैंसर सेल्स को रोकने में नाकाम रहता है।

20 कॉपियों का सुरक्षा कवच, खुद ही मर जाती हैं कैंसर कोशिकाएं

यूटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जब हाथियों के डीएनए (DNA) का बारीकी से अध्ययन किया, तो वे दंग रह गए। हाथियों के भीतर इस जीवनरक्षक ‘TP53’ जीन की 20 से ज्यादा कॉपियां (लगभग 40 एलील्स) मौजूद होती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि जैसे ही हाथी के शरीर में कोई कोशिका कैंसर से संक्रमित होने की कोशिश करती है, ये अतिरिक्त जीन तुरंत एक्टिव हो जाते हैं। वे उस खराब कोशिका को सुधारने में समय बर्बाद नहीं करते, बल्कि उसे सीधे ‘सेलुलर सुसाइड’ (Apoptosis) के लिए मजबूर कर देते हैं। आसान शब्दों में कहें तो हाथी का इम्यून सिस्टम कैंसर सेल को पनपने से पहले ही अंदर ही अंदर मार डालता है।

इंसानों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है यह खोज

‘JAMA’ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के बाद से चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद जागी है। वर्तमान में कई वैश्विक चिकित्सा संस्थान इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि क्या हाथियों के इस ‘TP53’ जीन मैकेनिज्म की नकल करके इंसानों के लिए कोई थेरेपी या दवा बनाई जा सकती है। अगर वैज्ञानिक इस फॉर्मूले को इंसानों पर लागू करने में सफल रहे, तो कैंसर का इलाज हमेशा के लिए बेहद आसान और असरदार हो जाएगा। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि हाथी न सिर्फ कैंसर बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचे रहते हैं और आसानी से 60 से 70 साल की लंबी जिंदगी जीते हैं। ऐसे में हाथियों का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जाति और चिकित्सा विज्ञान के भविष्य के लिए भी बेहद जरूरी है।

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