World Polio Day: दुनियाभर में हर साल 24 अक्टूबर का दिन स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खास माना जाता है। इस दिन को ‘विश्व पोलियो दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसका मकसद इस जानलेवा बीमारी के खतरों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और दुनिया को पूरी तरह पोलियो मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराना है। पोलियो एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को अपनी चपेट में लेती है। यह सीधे तौर पर नर्वस सिस्टम पर हमला करती है, जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित को हमेशा के लिए स्थायी लकवा यानी पक्षाघात का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, समय पर दी जाने वाली खुराक और टीकाकरण इस बीमारी का एकमात्र पक्का बचाव है।
इस महत्वपूर्ण दिवस की नीव रोटरी इंटरनेशनल द्वारा प्रसिद्ध चिकित्सा शोधकर्ता डॉ. जोनास साल्क के जन्मदिवस की याद में रखी गई थी। डॉ. साल्क के नेतृत्व में ही निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन को साल 1955 में ऐतिहासिक रूप से सफल घोषित किया गया था। इसके कुछ ही समय बाद, 1960 के दशक की शुरुआत में वैज्ञानिक अल्बर्ट सबिन द्वारा ओरल पोलियो वैक्सीन यानी ओ.पी.वी. विकसित की गई। मुंह के रास्ते दी जाने वाली इन दो बूंदों ने वैश्विक स्तर पर बच्चों तक टीकाकरण पहुंचाना बेहद आसान बना दिया, जिससे करोड़ों बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकी।
वैश्विक आंकड़े और साल 2026 की थीम
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे प्रयासों की यदि बात की जाए तो साल 1988 में विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल को समर्थन दिए जाने के बाद से स्थिति में क्रांतिकारी सुधार आया है। उस दौर में दुनिया भर में हर साल करीब साढ़े तीन लाख मामले सामने आते थे, लेकिन व्यापक टीकाकरण अभियानों के दम पर जंगली पोलियोवायरस के मामलों में 99 फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
इस साल यानी 2026 के लिए रोटरी इंटरनेशनल ने ‘One Day. One Focus: Ending Polio’ यानी ‘एक दिन, एक लक्ष्य: पोलियो का खात्मा’ का नारा दिया है। यह थीम दुनिया के हर कोने में साझा प्रयासों, अटूट टीकाकरण चक्र और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को अंतिम छोर तक पहुंचाने पर जोर देती है। जानकारों का मानना है कि इस बीमारी के वायरस को जड़ से मिटाने के लिए सरकारों से लेकर आम नागरिकों तक को अपनी सहभागिता निभानी होगी।
भारत की ऐतिहासिक सफलता और सतर्कता
भारत के परिप्रेक्ष्य में यह उपलब्धि गर्व का विषय है। देश को 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के साथ आधिकारिक तौर पर पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया था। भारत में जंगली पोलियोवायरस का आखिरी केस 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में सामने आया था। यह ऐतिहासिक सफलता हमारे पल्स पोलियो अभियान, दूरदराज के इलाकों तक काम करने वाले फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स और घर-घर जाकर बच्चों को खुराक पिलाने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा थी।
भले ही भारत पोलियो मुक्त हो चुका है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हम अपनी चौकसी छोड़ दें। पड़ोसी देशों से वायरस के लौटने का खतरा और कम टीकाकरण वाले क्षेत्रों में संक्रमण फैलने की आशंका आज भी बनी हुई है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ माता-पिता को सलाह देते हैं कि वे अपने पांच साल से कम उम्र के बच्चों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत पोलियो की सभी निर्धारित खुराकें समय पर जरूर दिलवाएं ताकि यह बीमारी फिर कभी पैर न पसार सके।

