Yamunanagar Liquor Scam: एक्साइज के सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर 21.30 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
एक्साइज के सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर 21.30 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
Yamunanagar Liquor Scam: यमुनानगर में शराब कारोबार से जुड़ा करोड़ों रुपये का कथित घोटाला अब आबकारी एवं कराधान विभाग (Excise and Taxation Department) के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। शिकायतकर्ता अभिनव कोहली ने शराब की दो बड़ी फर्मों पर संगीन आरोप लगाते हुए दावा किया है कि विभाग के आधिकारिक सॉफ्टवेयर में तकनीकी हेरफेर की गई। उनका आरोप है कि 100 से अधिक बार फर्जी ई-GRN (Goods Receipt Note) नंबर जनरेट कर सरकारी खजाने को करीब 21.30 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई है। इस खुलासे के बाद से ही आबकारी महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
सील गोदाम दो दिन में खोलने पर उठे गंभीर सवाल
मामला तूल पकड़ते ही शुरुआती कार्रवाई के तहत विभाग ने दोनों संबंधित शराब फर्मों के गोदामों को सील कर दिया था। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि सीलबंदी के महज 48 घंटे के भीतर गोदामों को दोबारा खोल दिया गया, जो पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाता है। अभिनव कोहली ने विभागीय कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मांग की है कि इतने बड़े पैमाने पर हुई आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में दोनों फर्मों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाएं और आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
एक्साइज विभाग का पक्ष: 5 करोड़ की रिकवरी, 31 करोड़ की संपत्ति अटैच
शिकायतकर्ता के तीखे हमलों के बीच अब आबकारी विभाग ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है। उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (DETC) जितेंद्र कुमार ने बताया कि विभाग मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग अब तक संबंधित फर्मों से करीब 5 करोड़ रुपये की वसूली कर चुका है और बाकी रकम की रिकवरी प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। DETC के अनुसार, दोनों फर्मों की लगभग 31 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति के दस्तावेज विभाग के पास जमा हैं, जिन्हें कानूनी रिकवरी का मुख्य आधार बनाया जा रहा है।
विशेष जांच कमेटी गठित, पहेली बनी अंतिम नुकसान की रकम
सरकारी राजस्व को हुए नुकसान का सटीक आकलन करने और सॉफ्टवेयर में हुई कथित सेंधमारी की परतें उधेड़ने के लिए आबकारी विभाग ने एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी पूरे मामले के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है। अब एक तरफ जहां शिकायतकर्ता सिस्टम में बड़ी सेंधमारी और 21.30 करोड़ के घोटाले के आरोपों पर अड़े हैं, वहीं आबकारी विभाग इसे रिकवरी और विभागीय जांच के जरिए सुलझाने का दावा कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जांच पूरी होने के बाद आखिरकार राजस्व नुकसान का असली आंकड़ा क्या निकलकर सामने आता है।
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