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YouTuber Jasbir Singh Bail: यूट्यूबर जसबीर सिंह को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: जासूसी और ISI से संबंधों के नहीं मिले सबूत, मिली जमानत

AAmandeep Singh
यूट्यूबर जसबीर सिंह को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: जासूसी और ISI से संबंधों के नहीं मिले सबूत, मिली जमानत
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हरियाणा। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने ‘Jaan Mahal’ यूट्यूब चैनल चलाने वाले चर्चित व्लॉगर जसबीर सिंह को एक बड़ी कानूनी लड़ाई में जीत दी है। पिछले 10 महीनों से जासूसी और देश विरोधी गतिविधियों के संगीन आरोपों में जेल की सलाखें काट रहे जसबीर को अदालत ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है जो जसबीर के संबंधों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जोड़ता हो।

मोबाइल डेटा और चैट में नहीं मिला ‘पाकिस्तानी’ सुराग

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जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की एकल पीठ ने मामले की समीक्षा करते हुए पाया कि पुलिस द्वारा जब्त किए गए जसबीर के मोबाइल और डिजिटल उपकरणों में कोई भी संदिग्ध मैसेज, कॉल रिकॉर्ड या चैट बरामद नहीं हुई है। पुलिस का दावा था कि जसबीर किसी जासूसी नेटवर्क का हिस्सा हैं, लेकिन कोर्ट ने नोट किया कि जसबीर के मोबाइल से किसी भी पाकिस्तानी नागरिक या एजेंसी के साथ बातचीत के सबूत नहीं मिले हैं। यह बिंदु डिफेंस के लिए सबसे मजबूत पक्ष साबित हुआ।

प्रतिबंधित नहीं थे यूट्यूब पर अपलोड वीडियो

पुलिस ने जसबीर के यूट्यूब व्लॉग्स को जासूसी का हथियार बताया था। आरोप था कि वे सेना की आवाजाही और संवेदनशील ठिकानों की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो में दिखाए गए स्थान सार्वजनिक रूप से सुलभ थे। राज्य सरकार यह साबित करने में विफल रही कि उन वीडियो में कोई ‘क्लासिफाइड’ (गोपनीय) या प्रतिबंधित जानकारी साझा की गई थी। कोर्ट ने माना कि महज वीडियो बनाना ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ के उल्लंघन की श्रेणी में तब तक नहीं आता, जब तक कि उसमें कोई प्रतिबंधित सूचना न हो।

10 महीने का इंतजार और साफ दामन

जसबीर सिंह 3 जून 2025 से हिरासत में थे। उनके वकील ने दलील दी कि जसबीर का पिछला रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग रहा है और उन्हें केवल संदेह के आधार पर लंबी अवधि तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया कि मुकदमे के दौरान कई तकनीकी पहलुओं और साक्ष्यों की कमी है, जिस पर ट्रायल के दौरान बहस होगी। लंबी हिरासत और साफ रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें जमानत दे दी गई।

क्या था एसएसओसी का आरोप?

मोहाली की स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल (SSOC) ने पिछले साल जसबीर को गिरफ्तार कर दावा किया था कि वे व्लॉगिंग की आड़ में सेना के गुप्त ठिकानों की जानकारी सरहद पार भेज रहे हैं। इस मामले में हरियाणा की एक अन्य यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा का नाम भी घसीटा गया था और इसे एक बड़ा ‘स्पाई नेटवर्क’ बताया गया था। फिलहाल, हाई कोर्ट ने जसबीर को ट्रायल कोर्ट के समक्ष जमानत बांड भरने और जांच में सहयोग करने की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

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