Amardeep Singh Grewal ED arrest : पंजाब की फिल्मी दुनिया और सियासत में उस वक्त भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जाने-माने पंजाबी फिल्म प्रोड्यूसर अमरदीप सिंह ग्रेवाल को दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया। ‘मौजां ही मौजां’ और ‘स्नोमैन’ जैसी चर्चित फिल्मों से जुड़े ग्रेवाल पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने एक रेप केस को दबाने और एफआईआर रद्द करवाने के एवज में पांच करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी थी। केंद्रीय एजेंसी द्वारा लुकआउट सर्कुलर जारी किए जाने के बाद यह कार्रवाई अंजाम दी गई है।
समन भेजने के बावजूद जांच से बच रहे थे ग्रेवाल, एयरपोर्ट पर उतरे तो दबोचा
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने अमरदीप सिंह ग्रेवाल को पूछताछ के लिए बीते 7 अक्टूबर और फिर 9 अक्टूबर को दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में तलब किया था। लेकिन, फिल्म प्रोड्यूसर दोनों ही मौकों पर जांच अधिकारियों के सामने पेश नहीं हुए।
कानूनी शिकंजा कसता देख जैसे ही ग्रेवाल ने देश से बाहर जाने की कोशिश की, एयरपोर्ट पर सतर्क एजेंसियों ने उन्हें रोक लिया और पूछताछ के लिए सीधे ईडी मुख्यालय ले गए। हालांकि, इस मामले में एजेंसी की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन इस गिरफ्तारी से सनसनी फैल गई है।
मोहाली के सोहाना थाने में दर्ज रेप केस से जुड़े हैं तार
पूरा मामला इस साल 1 मई को मोहाली के सोहाना थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। गुरविंदर सिंह उर्फ गुरी चहल के खिलाफ एक 26 वर्षीय युवती ने बलात्कार, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकियों के गंभीर आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। इसके बाद कहानी तब और पेचीदा हो गई जब यह आरोप सामने आए कि इस हाई-प्रोफाइल मामले को मैनेज करने और एफआईआर खत्म करवाने के नाम पर पांच करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। इस कथित सौदेबाजी में अमरदीप सिंह ग्रेवाल का नाम मुख्य रूप से उछलकर सामने आया।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, जांच स्पेशल डीजीपी को सौंपी गई
पीड़िता के परिवार ने न्याय की उम्मीद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि स्थानीय पुलिस मामले में लीपापोती कर रही है और अमरदीप सिंह ग्रेवाल अपने रसूख का इस्तेमाल कर समझौते का दबाव बना रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए 20 जुलाई को हाईकोर्ट ने जांच स्थानीय पुलिस से लेकर स्पेशल डीजीपी की निगरानी में एक सीनियर आईपीएस अधिकारी को सौंप दी। अदालत ने अपने आदेश में पांच करोड़ की मांग से जुड़े दावों का भी जिक्र किया था, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भी इस पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई थी।

