September 27, 2026

Ambala Building Collapse: अंबाला में लेंटर डालते ही गिरी 3 मंजिला इमारत, मलबे में दबे 40 से ज्यादा मजदूर, 4 की मौत

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Ambala Building Collapse: अंबाला में लेंटर डालते ही गिरी 3 मंजिला इमारत, मलबे में दबे 40 से ज्यादा मजदूर

अंबाला में लेंटर डालते ही गिरी 3 मंजिला इमारत, मलबे में दबे 40 से ज्यादा मजदूर

Ambala Building Collapse: हरियाणा के अंबाला से एक बेहद खौफनाक हादसे की खबर सामने आई है। रविवार को अंबाला के धूलकोट गांव में एक तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। (Dulkote village accident Ambala)  हादसा उस वक्त हुआ जब तीसरी मंजिल पर लेंटर डालने का काम जोर-शोर से चल रहा था।

अचानक हुए इस हादसे से मौके पर भगदड़ मच गई। बताया जा रहा है कि ढलाई के वक्त इमारत में करीब 40 से 50 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से कई लोग कंक्रीट और लोहे के सरियों के भारी मलबे के नीचे दब गए।

चीख-पुकार के बीच स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा, 10 अस्पताल पहुंचे

इमारत गिरते ही जोर का धमाका हुआ और चारों तरफ धूल का गुबार फैल गया। (Haryana building collapse news) आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों की मुस्तैदी से मलबे के ऊपरी हिस्से में फंसे 10 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया। 4 की मौत , सभी घायलों को तत्काल एंबुलेंस की मदद से अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और एनडीआरएफ ( NDRF rescue operation Ambala) की टीमें भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंचीं। जेसीबी और कटर मशीनों के जरिए मलबे को हटाने और सरियों को काटने का काम लगातार जारी है ताकि नीचे दबे अन्य मजदूरों को सांस लेने की जगह मिल सके और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

मामले की नजाकत को देखते हुए डीएसपी शिवम ने बताया कि पुलिस और एनडीआरएफ की पूरी टीम मौके पर डटी हुई है। पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे हर एक इंसान की जान बचाना है।

‘दो दिन पहले ही दी थी चेतावनी’— चश्मदीद मजदूर ने खोले घटिया निर्माण के राज

इस भीषण हादसे के पीछे ठेकेदार और मिस्त्री की सरासर लापरवाही सामने आ रही है। (Ambala Civil Hospital news) बिहार के रहने वाले मजदूर रामचंद्र ने बताया कि वह भी इसी साइट पर काम करता था। उसने आरोप लगाया कि दो दिन पहले लेंटर के लिए जो शटरिंग बांधी गई थी, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब थी और उसमें भारी खामियां थीं।

रामचंद्र के मुताबिक, उसने मिस्त्री और सुपरवाइजर को चेताया भी था कि यह शटरिंग लेंटर का वजन नहीं झेल पाएगी। जब उसकी बात अनसुनी कर दी गई, तो उसने डर के मारे वहां काम करना छोड़ दिया। रामचंद्र ने बताया कि हादसे के वक्त काम की देखरेख कर रहा सुपरवाइजर मलकीत, मिस्त्री राम, राजेंद्र और अजय भी भारी शटरिंग और मलबे के नीचे ही दब गए हैं। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है।

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