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Ambala Bus Stand CCTV Issue: अंबाला: 24 सीसीटीवी कैमरे तीन दिन से ठप, भगवान भरोसे 10 हजार यात्रियों की सुरक्षा

GGaganpreet Kaur
अंबाला: 24 सीसीटीवी कैमरे तीन दिन से ठप, भगवान भरोसे 10 हजार यात्रियों की सुरक्षा
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अंबाला। अंबाला छावनी का मुख्य बस अड्डा, जिसे क्षेत्र का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र माना जाता है, इस समय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और लावारिस स्थिति में है। पिछले तीन दिनों से इस पूरे परिसर की निगरानी करने वाले 24 सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह से सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े और वीआईपी मूवमेंट वाले बस अड्डे पर केवल तीन कैमरे ही चालू हालत में काम कर रहे हैं। ऐसे में यदि परिसर के भीतर कोई बड़ी वारदात, चोरी या अप्रिय घटना घट जाए, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर रोडवेज विभाग के आला अधिकारी गहरी नींद सोए हुए हैं।

800 बसें और 10 हजार मुसाफिर, जेबकतरों और चोरों के लिए खुला मैदान

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अंबाला कैंट का यह बस अड्डा न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराज्यीय बसों के लिए भी मुख्य पड़ाव है। यहाँ से रोजाना उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के लिए करीब 800 बसों का आना-जाना होता है। इस वजह से दिन-रात मिलाकर यहाँ कम से कम 10 हजार से अधिक मुसाफिरों की भीड़ जुटती है। इतनी बड़ी तादाद में आम जनता की मौजूदगी वाले स्थान पर सुरक्षा का ऐसा ढीला रवैया किसी बड़े हादसे को न्यौता दे रहा है। कैमरों के बंद होने की भनक लगते ही बस अड्डे पर सक्रिय रहने वाले जेबकतरों, चोरों और महिला यात्रियों से छेड़छाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हो गए हैं।

आंधी में टूटे तार, तीन दिन बाद भी नहीं सुधारी जा सकी तकनीकी खराबी

जब इस सुरक्षा चूक को लेकर ग्राउंड जीरो पर पड़ताल की गई और संस्थान प्रबंधक व मुख्य इंस्पेक्टर रमेश से बात की गई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। उनके मुताबिक, बीती 13 मई की रात को इलाके में आई भीषण आंधी के कारण बस अड्डा परिसर में दो भारी-भरकम पेड़ उखड़कर गिर गए थे। इन पेड़ों की चपेट में आने से सीसीटीवी कैमरों के मुख्य केबल (तार) टूट गए और पूरा मॉनिटरिंग सिस्टम ठप हो गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीन दिन का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी इन तारों को जोड़ने या किसी तकनीशियन को बुलाकर सिस्टम को रीबूट करने की जहमत रोडवेज प्रबंधन ने क्यों नहीं उठाई?

बिजली कटते ही कैमरों का ‘ब्लैकआउट’, जेनरेटर तो है पर कनेक्शन नहीं

रोडवेज महकमे की लापरवाही का आलम सिर्फ आंधी की वजह से टूटे तारों तक ही सीमित नहीं है। बस अड्डे के सुरक्षा तंत्र की पोल उस वक्त और खुल जाती है जब यहाँ बिजली गुल होती है। आम दिनों में भी लाइट जाते ही ये सीसीटीवी कैमरे घंटों के लिए बंद हो जाते हैं। करोड़ों की लागत से आधुनिक उपकरण लगाने के बावजूद इन्हें अभी तक बस अड्डे के मुख्य बैकअप जनरेटर से कनेक्ट नहीं किया गया है। जैसे ही सरकारी बिजली कटती है, पूरा बस अड्डा परिसर पूरी तरह से कैमरों की सर्विलांस से बाहर हो जाता है। दिलचस्प बात यह है कि परिसर में भारी-भरकम जेनरेटर मौजूद है, लेकिन उसका प्रशासनिक और तकनीकी कंट्रोल रोडवेज के पास न होकर किसी अन्य विभाग के पास है, जिसके चलते यह तालमेल आज तक नहीं बैठ पाया।

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