Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Ambala Mandi Mustard Rate: अंबाला के किसानों की बढ़ी टेंशन: MSP से 700 रुपये नीचे बिक रही सरसों, जानें बड़ी वजह

AAmandeep Singh
अंबाला के किसानों की बढ़ी टेंशन: MSP से 700 रुपये नीचे बिक रही सरसों, जानें बड़ी वजह
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

अंबाला। अंबाला शहर की अनाज मंडी इन दिनों पीली और काली सरसों की ढेरी से पटी पड़ी है। इस बार मंडी में सरसों की आवक पिछले साल के मुकाबले तीन गुना ज्यादा दर्ज की गई है, लेकिन विडंबना देखिए कि किसान अपनी फसल को सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं बेच पा रहे हैं। सरकारी खरीद प्रक्रिया अभी तक ठंडे बस्ते में है, जिसके चलते किसानों को अपनी नकदी की जरूरतें पूरी करने के लिए निजी डीलरों और आढ़तियों की शरण लेनी पड़ रही है। मंडी में फिलहाल काली सरसों का भाव 5550 से 5800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास झूल रहा है, जो सरकारी रेट 6200 रुपये से काफी कम है।

लोकल खरीद केंद्र का न होना किसानों पर पड़ा भारी

विज्ञापन

किसानों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि अंबाला शहर जैसी बड़ी मंडी होने के बावजूद यहां सरकारी खरीद केंद्र नहीं बनाया गया है। प्रशासन ने खरीद के लिए शहजादपुर मंडी को केंद्र तय किया है। किसानों का कहना है कि शहजादपुर तक फसल ले जाने में न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि वहां तक का भारी-भरकम किराया भी उनकी जेब पर डाका डाल रहा है। इन्हीं मजबूरियों का फायदा उठाकर बिचौलिए किसानों से औने-पौने दाम पर फसल उठा रहे हैं। हालांकि पीली सरसों के दाम 6200 से 7400 रुपये तक मिल रहे हैं, लेकिन सरकार इसकी अलग से कोई MSP घोषित नहीं करती, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है।

मार्केट कमेटी का तर्क: किसान को है 28 मार्च का इंतजार

एक तरफ किसान घाटा झेल रहे हैं, तो दूसरी तरफ मार्केट कमेटी के अधिकारी इसे किसानों की ‘पसंद’ बता रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी खरीद 28 मार्च से विधिवत रूप से शुरू होगी। अगर किसान को एमएसपी पर फसल बेचनी है, तो वह तब तक इंतजार कर सकता है या फिर निर्धारित केंद्र शहजादपुर जा सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि छोटे किसान को अगली फसल की तैयारी और घर के खर्चों के लिए तुरंत पैसे की दरकार होती है, जिसके कारण वह 28 मार्च तक रुकने की स्थिति में नहीं है। प्रशासन की इस सुस्ती का सीधा खामियाजा अंबाला के अन्नदाता को अपनी मेहनत की कमाई गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

विज्ञापन

अंबाला की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।