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Ambala Mayor Election 2026: अंबाला मेयर चुनाव: भाजपा प्रत्याशी अक्षिता सैनी के नामांकन पर संकट, हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

GGaganpreet Kaur
अंबाला मेयर चुनाव: भाजपा प्रत्याशी अक्षिता सैनी के नामांकन पर संकट, हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
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अंबाला। हरियाणा के निकाय चुनावों की तपिश अब अदालती गलियारों तक जा पहुंची है। अंबाला सिटी मेयर पद के लिए भाजपा की उम्मीदवार अक्षिता सैनी के नामांकन को लेकर एक बड़ा कानूनी संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी कुलविंदर कौर ने अक्षिता के हलफनामे को ‘अधूरा और भ्रामक’ बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। इस कानूनी चुनौती ने न केवल भाजपा खेमे में हलचल मचा दी है, बल्कि पूरे चुनाव के समीकरणों को भी दांव पर लगा दिया है।

बेटी का जिक्र, पर पति के कॉलम में ‘लागू नहीं’?

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याचिकाकर्ता कुलविंदर कौर का सबसे बड़ा प्रहार अक्षिता सैनी के चुनावी शपथपत्र (फॉर्म 1-सी) पर है। याचिका के मुताबिक, अक्षिता ने अपने हलफनामे में एक तरफ तो अपनी नाबालिग बेटी अनन्या सैनी का पूरा विवरण दिया है, लेकिन दूसरी तरफ पति वाले कॉलम में जानबूझकर ‘नॉट एप्लीकेबल’ (लागू नहीं) लिख दिया। कुलविंदर कौर का तर्क है कि मतदाताओं को अपने प्रत्याशी की वित्तीय स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि जानने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन अक्षिता ने पति की संपत्ति और पैन कार्ड का ब्यौरा न देकर इस अधिकार का हनन किया है।

थाने की एफआईआर बनी गले की फांस

अक्षिता सैनी के खिलाफ इस कानूनी लड़ाई को मजबूती देने के लिए कुलविंदर कौर के वकील नरिंदर सिंह बहगल ने एक अहम दस्तावेज पेश किया है। याचिका में दावा किया गया है कि अक्षिता सैनी ने साल 2024 में खुद अंबाला सिटी थाने में अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई थी। वकील का कहना है कि यह एफआईआर इस बात का पुख्ता कानूनी सबूत है कि अक्षिता विवाहित हैं। ऐसे में हलफनामे में जानकारी को छिपाना चुनावी नियमों का सीधा उल्लंघन है।

रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर भी सवाल

याचिका में जिला प्रशासन और रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यप्रणाली को भी घेरे में लिया गया है। कुलविंदर कौर का आरोप है कि उन्होंने नामांकन प्रक्रिया के दौरान ही इन तमाम विसंगतियों पर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने इन गंभीर त्रुटियों को महज ‘लिपिकीय गलती’ (Clerical Error) मानकर खारिज कर दिया। याचिका में इस फैसले को ‘अवैध और मनमाना’ करार दिया गया है।

अंबाला सेक्टर-10 निवासी 60 वर्षीय कुलविंदर कौर ने अनुच्छेद 226 और 227 के तहत अपनी याचिका में साफ कहा है कि पारदर्शिता के बिना निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। अब सबकी नजरें 11 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि हाईकोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि अंबाला की इस सियासी जंग में भाजपा प्रत्याशी मैदान में टिकी रहेंगी या उनकी उम्मीदवारी पर कैंची चलेगी।

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