अंबाला। अंबाला के नारायणगढ़ में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का टकराव एक बार फिर सड़क पर नजर आया। खंड शिक्षा अधिकारी और एसडीएम दफ्तर के बाहर आज मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। वर्कर्स का गुस्सा ब्लॉक के सुरगल और छोटी रसोर स्कूलों से दो महिला कर्मियों, परमजीत कौर और ममता देवी को अचानक नौकरी से निकाले जाने को लेकर था। यूनियन का सीधा आरोप है कि प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की है।
स्कूलों को मर्ज करने का बहाना, ₹7000 के मानदेय पर भी आफत
यूनियन की खंड प्रधान राज कुमारी और सचिव कविता ने सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। उनका कहना है कि सरकार स्कूलों को मर्ज करने की आड़ में उन गरीब महिलाओं के पेट पर लात मार रही है, जिनका घर इसी काम से चलता है। वहीं प्रदर्शन में शामिल सीटू (CITU) के राज्य सचिव सतीश सेठी ने सरकार के महिला सशक्तीकरण के नारों को खोखला बताया। उन्होंने कहा कि आज के महंगाई के दौर में इन वर्कर्स को महज 7,000 रुपये महीना दिया जा रहा है, और विडंबना देखिए कि वह भी महीनों तक नसीब नहीं होता।
बंधुआ मजदूरों की तरह काम लेने का आरोप, आर-पार की लड़ाई का मूड
प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय स्कूल प्रबंधनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मिड डे मील वर्कर्स से खाना बनवाने के अलावा स्कूलों में झाड़ू-पोछा और घास छीलने जैसे बेगार के काम जबरन करवाए जाते हैं। मना करने पर नौकरी से निकालने की धौंस दी जाती है। अधिकारियों ने हालांकि इस मामले को उच्चाधिकारियों के सामने रखने का घिसा-पिटा आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन वर्कर्स अब आर-पार के मूड में हैं। यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर यह जनविरोधी फैसला वापस नहीं हुआ, तो 5 जून को पानीपत में शिक्षा मंत्री के दफ्तर पर बड़ा प्रदर्शन होगा।

