अंबाला। अंबाला और आसपास के इलाकों में आज सुबह-सुबह प्रकृति का बेहद रौद्र रूप देखने को मिला। अभी लोग सोकर उठे ही थे कि अचानक आसमान में दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया। देखते ही देखते घनघोर काले बादलों की ओट से उठी धूलभरी तेज आंधी और उसके बाद शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया। मौसम का यह बदलाव इतना अचानक और भीषण था कि पलक झपकते ही जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। सबसे ज्यादा नुकसान सड़कों और हाईवे पर देखने को मिला, जहां रफ्तार से दौड़ते वाहनों के पहिए अचानक थम गए।
हाईवे 152-D पर पलटे तीन कैंटर, बाल-बाल बची चालकों की जान
इस चक्रवाती तूफान का सबसे खतरनाक असर नेशनल हाईवे 152-D पर देखने को मिला। हाईवे पर हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि उसके थपेड़ों को भारी-भरकम वाहन भी बर्दाश्त नहीं कर पाए। तेज अंधड़ के कारण एक के बाद एक तीन बड़े कैंटर असंतुलित होकर बीच सड़क पर ही पलट गए।
कैंटरों के पलटने से हाईवे पर चीख-पुकार मच गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस खौफनाक हादसे में किसी की जान जाने की खबर नहीं है और सभी चालक सुरक्षित हैं, लेकिन गाड़ियों के पलटने और मलबे के कारण हाईवे पर लंबा जाम लग गया।
उखड़े पेड़ और बिजली के खंभे, ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई
तूफान का असर सिर्फ हाईवे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंबाला शहर के भीतर भी कई इलाकों में भारी तबाही हुई है। आंधी के तांडव के कारण कई दशकों पुराने भारी-भरकम पेड़ जड़ से उखड़कर सड़कों पर आ गिरे। पेड़ों के साथ ही बिजली के कई खंभे और ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे कई इलाकों की बत्ती पूरी तरह गुल हो गई है। सड़कों पर पेड़ गिरने की वजह से जिले की पूरी ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत हरकत में आईं और जेसीवी मशीनों की मदद से पेड़ों को हटाने तथा हाईवे को सुचारू करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।

