Amit Shah Punjab Visit: पंजाब में नशे की समस्या और इससे प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के कारण अपने प्रियजनों को खो चुके परिवारों से सीधे बातचीत कर उनकी परेशानियां सुनीं। उनके मुताबिक, इस संवाद से उन परिवारों की शिकायतों को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने में मदद मिली है, जो लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मंगलवार, 20 अक्टूबर को मोहाली में जारी बयान में संधू ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल आंकड़ों, कानून प्रवर्तन और राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
इसके केंद्र में प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना, उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। संधू ने कहा कि नशे से प्रभावित लोगों और अपने प्रियजनों को खो चुके परिवारों को अकेले संघर्ष करने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और न्याय पाने की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने अमित शाह की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने से उनकी समस्याओं पर ध्यान गया है।
गुलजार सिंह के परिवार और अन्य पीड़ितों के परिजनों से की मुलाकात
संधू के मुताबिक, तरनतारन क्षेत्र के बंजारा में गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान वह भी मौजूद थे। इस दौरान अमित शाह ने स्वर्गीय गुलजार सिंह की पत्नी और उनके दो बेटों से मुलाकात की। उन्होंने मोहंजीत शेरों और समनदीप सिंह की माताओं से भी अलग-अलग बातचीत की और उनकी चिंताओं को सुना। संधू ने बताया कि बातचीत के दौरान शोकाकुल परिवारों ने अपने दिवंगत परिजनों की भोग रस्में लंबित होने को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, गृह मंत्री ने परिवारों की बात सुनी और उन्हें न्याय मिलने तथा भोग रस्में संपन्न होने को लेकर आश्वासन दिया। सांसद ने कहा कि इन परिवारों के लिए न्याय केवल राजनीतिक आश्वासन का विषय नहीं है, बल्कि यह जवाबदेही, सम्मान और मानसिक संतोष से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि अपनों को खोने के बाद परिवारों को अपनी पीड़ा व्यक्त करने और न्याय की मांग उठाने का अधिकार है। उनकी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
दशहरे का संदेश और नशे के खिलाफ कार्रवाई की मांग
संधू ने दशहरे के अवसर पर अमित शाह के पंजाब दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश नशे के खिलाफ लड़ाई में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशा तस्करी में शामिल नेटवर्कों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ उन लोगों की सुरक्षा भी जरूरी है, जो इस समस्या के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। सांसद के मुताबिक, पंजाब में नशे की समस्या का समाधान केवल बयानों से नहीं हो सकता। इसके लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों की प्रभावी कार्रवाई, अलग-अलग स्तरों पर जवाबदेही और पीड़ित परिवारों की शिकायतों पर ठोस प्रगति जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को न्याय और नागरिकों को व्यवस्था पर भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक नशे के खिलाफ अभियान अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाएगा। संधू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नशामुक्त पंजाब के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की सीधी सुनवाई से उनकी शिकायतों को व्यापक स्तर पर उठाने का अवसर मिला है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब मामलों में आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो और परिवारों को न्याय मिलने की दिशा में ठोस प्रगति नजर आए।
पंजाब सरकार से मांगा जवाब, लंबित मामलों में कार्रवाई की मांग
सतनाम सिंह संधू ने पंजाब सरकार से सवाल किया कि जिन परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिला है, उनके मामलों में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, जहां जरूरत हो वहां जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और परिवारों की शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी देनी चाहिए। संधू ने कहा कि प्रभावित परिवार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब और कार्रवाई चाहते हैं। उनके अनुसार, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नशा तस्करी में शामिल कोई भी व्यक्ति या नेटवर्क कानून की पहुंच से बाहर न रहे।
उन्होंने मामलों में हुई प्रगति की जानकारी सार्वजनिक करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। सांसद ने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने और नशामुक्त भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए न्याय, जवाबदेही और जनविश्वास को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि हर शिकायत को गंभीरता से सुनना, पीड़ित परिवारों की समस्याओं पर कार्रवाई करना और नशे के नेटवर्क के खिलाफ ठोस कदम उठाना इस लड़ाई की अहम कसौटी है।
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