Amritsar Langur Mela Bada Hanuman Mandir : अमृतसर के ऐतिहासिक दुर्ग्याणा तीर्थ स्थित बड़े हनुमान मंदिर में आज (रविवार, 11 अक्टूबर) से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक ‘लंगूर मेला’ पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है।
शारदीय नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले इस अनोखे मेले में सैकड़ों मासूम बच्चे लंगूर का रूप धारण कर बजरंगबली के दर पर नतमस्तक हो रहे हैं। लाल गोटेदार पोशाक, सिर पर शंकु जैसी टोपी और हाथ में छोटी छड़ी लिए मंदिर परिसर में पहुंचे बच्चे हर किसी का ध्यान खींच रहे हैं।
संतान प्राप्ति की मन्नत और गहरी आस्था का प्रतीक
अमृतसर के बड़े हनुमान मंदिर में लंगूर मेला आयोजित होने के पीछे सनातन परंपरा और श्रद्धालुओं की अगाध आस्था जुड़ी हुई है। मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान सुख प्राप्त नहीं होता, वे यहां आकर भगवान हनुमान से मन्नत मांगते हैं। जब बजरंगबली की कृपा से उनके घर बच्चे का जन्म होता है, तो माता-पिता नवरात्रि के पावन अवसर पर अपने बच्चे को मंदिर लेकर आते हैं और उसे लंगूर का बाणा (वेशभूषा) पहनाकर अपनी मन्नत पूरी करते हैं। इस अवधि में बच्चे को साक्षात हनुमान जी का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है।
10 दिनों की कठिन साधना और नियमों का पालन
लंगूर बनने की यह प्रक्रिया केवल वेशभूषा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक तरह की धार्मिक साधना है। लंगूर बने बच्चों को नवरात्रि के 10 दिनों तक बेहद सख्त और अनुशासित नियमों का पालन करना पड़ता है। लाल गोटेदार कपड़े, खास तरह की टोपी और छड़ी धारण करने के साथ-साथ खान-पान और दिनचर्या से जुड़े कई धार्मिक नियमों का ध्यान रखा जाता है। परिवार के सदस्य पूरी श्रद्धा के साथ इन नियमों का पालन करवाने में बच्चों की मदद करते हैं।
रावण दहन के अगले दिन उतरता है चोला
मेले की प्राचीन परंपरा के अनुसार, विजयादशमी यानी दशहरा के दिन रावण दहन होने के अगले दिन सुबह लंगूर बने सभी बच्चे बड़े हनुमान मंदिर में माथा टेकते हैं। इसके बाद वे विधि-विधान के साथ अपना चोला उतारते हैं और उनकी 10 दिवसीय धार्मिक साधना संपन्न होती है। अमृतसर का यह अनूठा मेला हर साल न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

