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Anil Vij News: अनिल विज का बड़ा एक्शन: बिजली-परिवहन विभाग में 1 करोड़ से ऊपर की खरीद पर लगी 'ब्रेक'

AAmandeep Singh
अनिल विज का बड़ा एक्शन: बिजली-परिवहन विभाग में 1 करोड़ से ऊपर की खरीद पर लगी 'ब्रेक'
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हरियाणा। हरियाणा की राजनीति में अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए मशहूर कैबिनेट मंत्री अनिल विज अब विभागों में होने वाली बड़ी खरीद-फरोख्त को लेकर ‘एक्शन मोड’ में आ गए हैं। IDFC बैंक घोटाले की गूंज के बाद सरकार की हुई किरकिरी से सबक लेते हुए विज ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म करने के लिए नया फरमान जारी किया है। उन्होंने बिजली, परिवहन और श्रम विभाग के आला अधिकारियों को दो टूक कह दिया है कि अब 1 करोड़ रुपये से अधिक का कोई भी टेंडर या खरीद उनकी जानकारी के बिना आगे नहीं बढ़ेगी।

सिर्फ फाइल नहीं, वजह भी बतानी होगी

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नए निर्देशों के तहत अब अधिकारियों के लिए सिर्फ फाइल चलाना काफी नहीं होगा। उन्हें लिखित में यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित सामान की वास्तव में विभाग को कितनी आवश्यकता है और इसे क्यों खरीदा जा रहा है। अब तक विभागों में करोड़ों की खरीदारी अक्सर निचले या मध्यम स्तर के अधिकारियों के जरिए ही निपटा दी जाती थी, जिससे कई बार अनावश्यक सामान की खरीद के आरोप लगते रहे हैं। विज के इस फैसले का सीधा मकसद सरकारी पैसे की बर्बादी को रोकना और सिस्टम में जवाबदेही तय करना है।

स्टॉक की जानकारी होगी ऑनलाइन, खत्म होगा ‘खेल’

विज ने सिर्फ खरीद पर ही नहीं, बल्कि स्टोर में पड़े सामान की निगरानी के भी निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग को विशेष रूप से कहा गया है कि उनके पास उपलब्ध ट्रांसफार्मर, केबल और अन्य उपकरणों के स्टॉक का पूरा डेटा ऑनलाइन किया जाए। अक्सर देखा गया है कि स्टोर में सामान मौजूद होने के बावजूद नई खरीद की फाइलें चल पड़ती हैं। डेटा ऑनलाइन होने से अब एक क्लिक पर पता चल सकेगा कि किस जिले के स्टोर में क्या सामान उपलब्ध है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

घोटाले के बाद ‘चेक एंड बैलेंस’ की तैयारी

दरअसल, IDFC बैंक घोटाले ने सरकारी तंत्र की वित्तीय सुरक्षा में बड़ी सेंध लगाई थी, जिसके बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। अनिल विज का यह कदम उसी डैमेज कंट्रोल का हिस्सा माना जा रहा है। जानकार मानते हैं कि सीधे मंत्री स्तर पर मॉनिटरिंग होने से न केवल खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि बिचौलियों और ठेकेदारों के सिंडिकेट पर भी लगाम लगेगी। विज के इस कड़े रुख ने विभाग के अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि अब हर बड़े खर्च पर ‘गब्बर’ की पैनी नजर रहने वाली है।

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