आज के दौर में हर दूसरा शख्स इस बात से परेशान है कि उम्र कम होने के बावजूद उसका शरीर और चेहरा बूढ़ा दिखने लगा है। अमूमन लोग इसके लिए प्रदूषण या आनुवंशिक (जेनेटिक) कारणों को जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन असल विलेन हमारी रोजमर्रा की खराब आदतें हैं। चिकित्सा विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है कि असमय बुढ़ापे के पीछे 80 फीसदी हाथ हमारी बेपटरी हो चुकी जीवनशैली का है। अगर कुछ आदतों को समय रहते न बदला गया, तो महंगी क्रीम और ब्यूटी प्रोडक्ट्स भी बेअसर साबित होने लगते हैं।
अधूरी नींद और तनाव: चेहरे की चमक छीनने वाले सबसे बड़े दुश्मन
इस समस्या की सबसे पहली शुरुआत होती है बिस्तर से। देर रात तक जागने और नींद पूरी न होने का सीधा असर आंखों के नीचे काले घेरों और सुस्त चेहरे के रूप में सामने आता है। नींद के दौरान हमारा शरीर खुद की मरम्मत (सेलुलर रिपेयर) करता है, जो अधूरी रह जाती है। रही-सही कसर आज का मानसिक तनाव पूरा कर देता है। जब इंसान लगातार तनाव में रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन त्वचा को टाइट रखने वाले ‘कोलेजन’ प्रोटीन को तोड़ देता है, जिससे चेहरे की त्वचा लटकने लगती है।
थाली का स्वाद और सुस्ती बढ़ा रही है उम्र की रफ्तार
हमारी रसोई और डाइट का भी एजिंग से गहरा नाता है। पिज्जा, बर्गर, अत्यधिक मीठा और डिब्बाबंद खाना खाने से शरीर में ‘इन्फ्लेमेशन’ यानी अंदरूनी सूजन बढ़ती है। यह सूजन सीधे तौर पर त्वचा की चमक को खा जाती है। इसके विपरीत, हरी सब्जियां, फल और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाना शरीर को भीतर से जवां रखता है। वहीं, घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने और शारीरिक कसरत से दूरी बनाने की आदत शरीर के ब्लड सर्कुलेशन (रक्त संचार) को धीमा कर देती है। जब तक त्वचा और अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलेगी, तब तक शरीर का फिट रहना नामुमकिन है।
धूप की तपिश और गैजेट्स की लाइट का डबल अटैक
घर से बाहर निकलने पर सूर्य की पराबैंगनी (यूवी) किरणें सीधे तौर पर झुर्रियों और पिगमेंटेशन (झाइयों) को बढ़ाती हैं, जिसके लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना सबसे बड़ी लापरवाही है। इसके साथ ही, अब एक नया खतरा ‘डिजिटल स्क्रीन’ के रूप में सामने आया है। मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के सामने लगातार घंटों बैठे रहने से निकलने वाली लाइट भी त्वचा के टिश्यूज को नुकसान पहुंचाती है।
तमाम रिसर्च और डॉक्टरों का यही मानना है कि सदाबहार जवानी या फिटनेस का कोई शॉर्टकट या जादुई कैप्सूल नहीं होता। अनुशासन, सही खान-पान, नियमित योग-व्यायाम और मुस्कुराते रहने की आदत ही उम्र के पहिए को धीमा रख सकती है।

