Asaram Interim Bail: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आसाराम को गुजरात के रेप केस में अंतरिम जमानत देने की मांग पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। 85 वर्षीय आसाराम ने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए राहत मांगी थी। उनकी याचिका गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ थी, जिसमें अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने आसाराम के वकील को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के तहत जोधपुर के मामले में पहले ही 26 अक्टूबर तक पैरोल मिल चुकी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट उनकी सजा के खिलाफ अपील पर भी सुनवाई कर रहा है। अदालत ने अपील को 17 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। यानी फिलहाल आसाराम को बीमार पत्नी से मिलने के लिए गुजरात केस में अलग से अंतरिम जमानत नहीं मिली है। उनकी मौजूदा राहत राजस्थान के मामले में मिली पैरोल के आधार पर है।
गुजरात केस में क्यों मांगी थी अंतरिम जमानत?
आसाराम ने 2013 के गांधीनगर यौन शोषण मामले में अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए अंतरिम जमानत मांगी थी। गुजरात की अदालत में दोषी ठहराए जाने के कारण उन्हें केवल राजस्थान के मामले में मिली राहत के आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता था। इसी वजह से उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुनवाई के दौरान राजस्थान और गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम को दोनों राज्यों में अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया है। उन्होंने कहा कि आसाराम ने पहले स्वास्थ्य के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट से पैरोल मांगी थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
इसके बाद आसाराम ने गुजरात हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत की मांग की। वहां भी राहत नहीं मिली। तुषार मेहता के मुताबिक, राजस्थान हाईकोर्ट ने बाद में राज्य के अधिकारियों को पैरोल से जुड़े आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। इसके बाद आसाराम ने अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग करते हुए दोबारा राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया और अंततः उन्हें पैरोल पर रिहा किया गया। तुषार मेहता ने कहा कि इसी बीच आसाराम ने अपनी पत्नी की खराब सेहत का हवाला देते हुए गुजरात हाईकोर्ट में फिर राहत मांगी थी। वहां से याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, राजस्थान के मामले में पैरोल मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात केस में अंतरिम जमानत की याचिका पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ाई।
राजस्थान केस में सजा के खिलाफ अपील पर 17 नवंबर को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में आसाराम की दो अलग-अलग याचिकाएं विचाराधीन थीं। पहली याचिका गुजरात के गांधीनगर मामले में अंतरिम जमानत से जुड़ी थी, जबकि दूसरी राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें जोधपुर के नाबालिग यौन शोषण मामले में उनकी सजा बरकरार रखी गई थी। सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि आसाराम के सरेंडर करने के बाद मामले में कानून से जुड़े एक अहम सवाल पर विचार किया जाएगा। अदालत ने केस के सबूतों और रिकॉर्ड को देखने का भी जिक्र किया।
सुनवाई में जस्टिस पारदीवाला ने आसाराम के वकील से कहा कि उन्हें यह दिखाना होगा कि किसी चूक के कारण पूरी सजा गलत साबित हो सकती है। आसाराम के वकील ने दलील दी कि उन्हें अन्य आरोपों में दोषी ठहराया जा सकता है, लेकिन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत बलात्कार के अपराध में दोषसिद्धि को चुनौती दी जा रही है। बचाव पक्ष का तर्क था कि इस आरोप के लिए जरूरी आधार साबित नहीं हुए। अदालत ने इस दलील पर अंतिम फैसला नहीं दिया और अपील की सुनवाई आगे के लिए तय कर दी।
ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए रजिस्ट्री को ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया है। इसमें डिजिटल और भौतिक, दोनों तरह के रिकॉर्ड शामिल होंगे। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड के सेट आसाराम, संबंधित राज्य और पीड़िता को भी उपलब्ध कराए जाएं। पीड़ित पक्ष के वकील ने सुनवाई के दौरान आसाराम की मेडिकल स्थिति से जुड़ी पिछली कार्यवाही का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राजस्थान मामले में अदालत की एक बेंच ने पहले एम्स से आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी, क्योंकि उन्होंने चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की थी।
वकील के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख था। इसके बाद अदालत ने उन्हें स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में दोबारा याचिका दाखिल करने की अनुमति दी थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात केस में बीमार पत्नी से मिलने के लिए अंतरिम जमानत की मांग पर सुनवाई नहीं की है। आसाराम की सजा के खिलाफ अपील पर 17 नवंबर को आगे की सुनवाई होगी। Click Here : पंजाब, मोहाली, चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों की ताज़ा खबरों और अपडेट्स से जुड़े रहने के लिए आप हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन कर सकते हैं। ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें

