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Haryana History: असीगढ़ किला: तलवारों की खनक से लेकर 'हिंदुस्तान की दहलीज' बनने तक का सफर

AAmandeep Singh
असीगढ़ किला: तलवारों की खनक से लेकर 'हिंदुस्तान की दहलीज' बनने तक का सफर
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हरियाणा। हरियाणा की धरती सिर्फ फसलों और अखाड़ों के लिए नहीं जानी जाती, बल्कि यहां के पत्थरों में भी इतिहास की गहरी छाप है। हिसार के पास हांसी में स्थित असीगढ़ का किला इसका सबसे जीवंत उदाहरण है। कभी ‘असीगढ़’ यानी तलवारों के दुर्ग के नाम से विख्यात यह किला मध्यकाल में इतना शक्तिशाली था कि कहा जाता था—जिसका हांसी पर कब्जा, उसका दिल्ली के तख्त पर राज। यही वजह है कि इसे सदियों तक ‘हिंदुस्तान की दहलीज’ के नाम से पुकारा गया। आज भी यहां का मशहूर ‘बड़सी गेट’ शहर के बीचों-बीच अपनी उसी पुरानी रसूख की याद दिलाता है।

पृथ्वीराज चौहान और तलवारों का गढ़

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इतिहास के पन्नों को पलटें तो 12वीं शताब्दी में इस किले की किस्मत महान शासक पृथ्वीराज चौहान के हाथों संवारी गई। उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से इसे अभेद्य बनवाया और यहां युद्ध के शस्त्र बनाने की बड़ी इकाइयां स्थापित कीं। उस दौर में हांसी में बनी तलवारों की मांग दूर-दराज के मुल्कों तक थी। सैन्य दृष्टि से यह किला इतना अहम था कि उत्तर-पश्चिम से आने वाले आक्रमणकारियों के लिए दिल्ली का रास्ता इसी किले के नीचे से होकर गुजरता था। यही कारण था कि दिल्ली फतह करने से पहले हर सुल्तान की नजर हांसी के इस किले पर टिकी रहती थी।

खुदाई में निकले सदियों पुराने राज

असीगढ़ किले की जमीन ने अपने भीतर सिर्फ युद्ध की कहानियां ही नहीं, बल्कि पूरी सभ्यताओं को समेट रखा है। साल 2004 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई खुदाई ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। इस टीले की गहराई से कुषाण, गुप्त, राजपूत, मुगल और सल्तनत काल के सिक्के और अवशेष मिले। यहां तक कि प्राचीन जैन मूर्तियां और मिट्टी के ऐसे बर्तन बरामद हुए, जो यह साबित करते हैं कि हांसी का यह इलाका हजारों सालों से सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। 1982 में भी यहां से जैन धर्म से जुड़ी बेशकीमती प्रतिमाएं मिली थीं, जो अब संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं।

विरासत का संरक्षण और आज की तस्वीर

आज भले ही समय की मार ने किले की प्राचीरों को थोड़ा कमजोर कर दिया हो, लेकिन इसकी ऐतिहासिक गरिमा आज भी बरकरार है। बड़सी गेट के नीचे से गुजरते हुए आज भी लोग उस दौर की स्थापत्य कला को महसूस कर सकते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए हांसी का यह किला किसी खुली किताब की तरह है। सरकार और प्रशासन की ओर से इसे संरक्षित करने के प्रयास जारी हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि हरियाणा का यह कोना कभी पूरे भारत की सत्ता का द्वार हुआ करता था।

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