Ateli Mandi News: अटेली मंडी के झंडा चौक पर श्री शिव रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला के नौवें दिन शृंगवेरपुर प्रवास, श्रीराम-केवट संवाद, सुमंत विलाप और दशरथ मरण की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया।
कलाकारों ने रामायण के इन प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया मंचन के दौरान राम, लक्ष्मण और सीता की भेंट भीलों के राजा निषादराज से हुई। निषादराज ने अपने वन क्षेत्र में प्रभु श्रीराम का भावपूर्ण स्वागत किया। इसके बाद श्रीराम, लक्ष्मण और सीता वन पथ पर आगे बढ़े और गंगा तट पर पहुंचे।
वहां उन्होंने अपने साथ आए सुमंत को रथ सहित अयोध्या वापस लौटा दिया।गंगा पार जाने के लिए केवट ने श्रीराम, लक्ष्मण और सीता को नाव में बैठाने से पहले उनके चरण धोए। श्रीराम ने अपने भक्त केवट के सिर पर हाथ रखकर उसे आशीर्वाद दिया। केवट ने कहा कि आज प्रभु उसके घाट पर आए हैं तो उसने उन्हें गंगा पार उतारा है।
जब वह प्रभु के घाट पर आएगा, तब श्रीराम उसे भवसागर से पार लगाएंगे। केवट की भक्ति और समर्पण का प्रसंग देखकर दर्शक भावुक हो गए। इसके बाद श्रीराम के चित्रकूट प्रवास और सुमंत के विलाप का मंचन किया गया। श्रीराम के वनवास के बाद सुमंत दुखी मन से अयोध्या लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने एक स्थान पर रथ रोककर करुण विलाप किया।
वहीं पुत्र वियोग में व्याकुल राजा दशरथ ने श्रीराम को पुकारते हुए अपने प्राण त्याग दिए। दशरथ मरण और सुमंत विलाप के दृश्यों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। मंचन में कांवट की भूमिका भगवान दास सैनी, श्रवण कुमार की भूमिका घनश्याम सैनी और निषादराज की भूमिका ललित सोनी ने निभाई। कार्यक्रम में ताजपुर के सरपंच राजकुमार, विजय मुद्गिल, बीना शर्मा और प्रेमलता देवी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इस मौके पर समिति के गौरव गर्ग कांवटिया ने कहा कि रामलीला के माध्यम से लोगों तक धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश पहुंचाया जा रहा है। ऐसे आयोजन समाज को मर्यादा, संस्कार और आदर्शों से जोड़ने का कार्य करते हैं। रामलीला मंच का संचालन मास्टर विजयपाल रोहिल्ला के द्वारा किया गया।
यह भी देखें – हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में 18वें राष्ट्रीय युवा संसद कार्यक्रम का भव्य आयोजन, परिसीमन विधेयक रहा आकर्षण का केंद्र

