Mahendragarh News: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में 18वें राष्ट्रीय युवा संसद कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने संसदीय कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक संवाद, विधायी प्रक्रिया और राष्ट्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए अपनी तार्किक क्षमता, वक्तृत्व कला और नेतृत्व कौशल का परिचय दिया।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, सम-कुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. दिनेश चहल के मार्गदर्शन एवं तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में राज्यसभा के पूर्व सांसद डी. पी. वत्स ने निर्णायक के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके साथ भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय के अधिकारी डॉ. भाविक पटेल तथा जिला युवा संसद अधिकारी डॉ. राकेश ने भी निर्णायक मंडल के सदस्य के रूप में कार्यक्रम में सहभागिता की। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के विचारों, तर्कों, अभिव्यक्ति, संसदीय मर्यादा तथा विषय की समझ का मूल्यांकन किया।

युवा संसद के दौरान प्रतिभागियों ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका निभाते हुए सदन की कार्यवाही का अनुकरण किया। प्रश्नों, तर्क-वितर्क, पक्ष-विपक्ष की प्रस्तुतियों और विधायी प्रक्रिया के माध्यम से विद्यार्थियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था के व्यावहारिक पक्षों को समझने का प्रयास किया। सदन में विचारों की स्पष्टता, तथ्यों पर आधारित तर्क, असहमति की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति तथा संसदीय शिष्टाचार ने कार्यक्रम को सार्थक बनाया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण परिसीमन विधेयक पर हुई चर्चा और उसके पक्ष में सदन द्वारा पारित किया जाना रहा। प्रतिभागियों ने परिसीमन से संबंधित विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और विधायी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई।
युवा संसद के संदर्भ में इस विधेयक पर चर्चा ने विद्यार्थियों को निर्वाचन व्यवस्था, प्रतिनिधित्व तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। यह उल्लेखनीय है कि युवा संसद में किसी विधेयक का पारित होना शैक्षणिक संसदीय अनुकरण का हिस्सा है और इसे वास्तविक संसद द्वारा विधेयक पारित किए जाने के समान नहीं माना जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रतिभागियों, आयोजकों और संबंधित अधिकारियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने युवाओं की सक्रिय भागीदारी तथा उनके बौद्धिक और नेतृत्व संबंधी विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों के महत्त्व को रेखांकित किया। सम-कुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने भी कार्यक्रम के उद्देश्य और युवा सहभागिता के महत्त्व के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित किया।
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